जानलेवा ‘ग्रेड फोर’
रणबीर सिंह दहिया
सत्ते, फत्ते, नफे, सविता अर कमला शनिवार नै फेर कट्ठे होगे। इतने मैं आईसीडीएस की बहन जी कमलजीत आगी। कमलजीत का मुंह सा उतररया था, होंठ सूकरे थे। कमला नै पहलम तो बहन जी ताहिं पानी प्याया फेर सते बोल्या – आज क्यूंकर उदास सी घूमण लागरी सो बहन जी? कमलजीत बोली – के बताऊं! वो नहीं सै धन्नू गडरिया।
सते बोल्या – हां औ दूसरे पान्ने मैं। के होग्या उसकै। कमलजीत उसकै तो किमै ना हुया फेर उसके बालकां की बहोत बुरी हालत सै। कमला – हां एक छोरी जो सबतैं छोटी सै वा तै मरकै बच्ची सै। कसूते दस्त लागरे थे उसकै। वा मनै सेठी डाक्टर के फेटी थी। कमलजीत – पीस्से थे कोण्या अर लियाई उसनै।
नफे – क्यूं ईब तै च्यार पांच भेड़ बी लोन ले कै पाली सै उसनै। ईबी इतना हाथ तंग क्यूं सै उसका? च्यार बालक सैं दो छोरी पांच साल तै बड्डी सैं अर एक छोरा एक छोरी पांच साल तै कम सैं। च्यारों बालकां कै कुपोषण सै।
खाण नै सै कोण्या फेर भूख उननै सहज-सहज खावण लागरी सै। फते – जिब बहन जी थाम इसमैं के हाथ अड़ा ल्योगे? थाम तो बताए सको सो ना अक बालकां नै पौष्टिक खुराक द्यो। ईब उनके मां बाप देवैं ना देवैं या उनकी मरजी।
इन ग्रेड फोर बालकां की सेहत ठीक करण ताहिं म्हारै धोरै कुछ बी कोण्या। उनके परिवार आल्यां की हालत खराब। तो इस सारे झंझट तै पैंडा छुटावण खातर म्हारी सीडीपीओबी न्यों कहदे सैं अक ग्रेड फोर मैं किसे बी बालक नै मतना दिखाओ। ईब मैं के करूं? दिखाऊं तो नौकरी मैं डांगर हांडैं अर ना दिखाऊं तो आत्मा कोण्या मानती।
सविता – बात तो सही सै बहन जी। जै ऊक चूक होगी तो मर तो आंगनबाड़ी आली की आवैगी। फेर यू ग्रेड फोर के बला सै इसका मतलब तै हमनै समझा दयो। कमलजीत – जिब बालक नै पूरा खाणा नहीं मिलै तो उसका शरीर कमजोर होज्या सै, अर वो बीमारियां का मुकाबला भी नहीं कर पान्ता। इस कमजोर शरीर के च्यार ग्रेड सैं। ग्रेड एक, ग्रेड दो, ग्रेड तीन अर ग्रेड च्यार। जो बालक ग्रेड फोर मैं चाल्या जा सै उसका जिंदा बचना बहोत मुश्किल होज्या सै।
सारे के सारे एक बै बोले – बहन जी जै ईसी बात सै तो हमनै बता हम के कर सकां सां। सरकार अर सरपंच तो पाछै देखांगे पहलम ओ ग्रेड फोर आला बालक क्यूंकर बचाया जा? कमलजीत – उस एक नै तो हम बचाल्यांगे फेर बाकी सात-आठ और सैं। उनका के बणैगा?
सत्ते – उनका बी सोचांगे फेर पहलमै तै उस गडरिए आले बालक की ज्यान क्यूंकर बचै न्यों बता। कमलजीत – ग्रेड फोर आले नै तो अस्पताल मैं भरती करवावां अर एक-एक कट्टा गिहूं थाम पांचों उसनै दे दयो ना तो वे बाकी तीन बालक बी ग्रेड फोर मैं पहोंच ज्यांगे। पांचों मानगे गिहूं देवण खातर अर 50-50 रुपये कट्ठे करकै उननै उसके अस्पताल के खरचे ताहिं दिये।
कमलजीत बहोतै राज्जी हुई। वा ग्रेड फोर आले बालक नै अस्पताल मैं लेगी उसका इलाज करवाया अर बाकी बालकां का कुपोषण भी चार-पांच म्हिने मैं ठीक होग्या। फेर कमलजीत कै चिंता थी अक ईब तो गिहूं दे दिये सत्ते हर नै फेर आगै? कमलजीत नै सरपंच तै बात करी अर पूरा किस्सा बताया अर कहया अक जै इन आठों बालकां नै ग्रेड फोर तै ग्रेड दो मैं लियावांगे तो थारे गाम का नाम होवैगा। सरपंच कै बी समझ आगी। उसने काम के बदले नाज स्कीम के तहत उन आठ घरां के लोगां ताहिं काम दिया जिसतै दो बख्त का चुल्हा उन घरां मैं ढंग तै जलण लाग्या।
ईब सवाल सै अक कड़ै सैं सत्ते, फत्ते, नफे, सविता अर कमला बरगे लोग? अर कड़ै सै कमलजीत बरगी आईसीडीएस को सुपरवाइजर बहन जी? यो जो ग्रेड फोर नै ल्हकोवण का धंधा सै इसका भंडा फोड़ कूण करैगा? इस कुपोषण की बीमारी नै जड़ तै खोवण खातर के करना पड़ैगा?
जिब ताहिं इन बातां पै गंभीरता तै बिचार नहीं करया जागा जिब ताहिं यू ग्रेड फोर का भय आईसीडीएस के महकमे नै खायें जागा अर बालक ग्रेड फोर का शिकार होन्ते रहवैंगे। सोचो मेरे बीरा इस ग्रेड फोर तै क्यूंकर छुटकारा मिल सकै सै?
पुनश्चः देख लिया सरकार नै आईसीडीएस का बजट घटा दिया।
