Homeसाहित्य/पुस्तक समीक्षामंजुल भारद्वाज की एक लघु कविता मंजुल भारद्वाज की एक लघु कविता 7 April 2026Pratibimb Media मंजुल भारद्वाज की एक लघु कविता व्यवस्था से हारी भीड़ जब गांव छोड़ शहर की ओर भागती है तब उसका लक्ष्य क्रांति नहीं सिर्फ़ पेट भरना होता है जिस दिन व्यवस्था से पलायन व्यवस्था निर्माण का संकल्प लेगा भारत में सिर्फ़ ग्राम स्वराज होगा! Post Views: 92 Like 0 0 Comments
जसवीर त्यागी की पांच कविताएं जसवीर त्यागी की पांच कविताएं विदा जब कोई अपना विदा होता है संसार से हमारा भी कुछ अंश उसके साथ…
सुधीर ढवळे की कविता – मैं मजदूर हूं छह साल जेल में रहने के बाद पिछले वर्ष बाहर आये मराठी कवि सुधीर ढवळे की कविता जिसे मज़दूर आंदोलन…