Homeसाहित्य/पुस्तक समीक्षामंजुल भारद्वाज की एक लघु कविता मंजुल भारद्वाज की एक लघु कविता 7 April 2026Pratibimb Media मंजुल भारद्वाज की एक लघु कविता व्यवस्था से हारी भीड़ जब गांव छोड़ शहर की ओर भागती है तब उसका लक्ष्य क्रांति नहीं सिर्फ़ पेट भरना होता है जिस दिन व्यवस्था से पलायन व्यवस्था निर्माण का संकल्प लेगा भारत में सिर्फ़ ग्राम स्वराज होगा! Post Views: 8
मनजीत ख़ान भावङिया की हरियाणवी कविता खोटा ज़माना घणा माड़ा टेम आग्या परिवार कुमबे की इज्जत ढेर एक बुझे रोटी की दुसरा कह खा गा के…
कर्मचारी आन्दोलन के ख्यातनाम नेता – बनवारीलाल बिश्नोई हरिय़ाणाः जूझते जुझारू लोग – 2 कर्मचारी आन्दोलन के ख्यातनाम नेता – बनवारीलाल बिश्नोई सत्यपाल सिवाच छियासी साल की उम्र…
लक्ष्मी सहगल से बातचीत- कैसा होगा आजादी के बाद हिन्दुस्तान का नक्शा किस्सा सुभाष चन्द्र बोस: वार्ता -4 (हरियाणवी रागनी) लक्ष्मी सहगल से बातचीत- कैसा होगा आजादी के बाद हिन्दुस्तान का नक्शा…