Homeसाहित्य/पुस्तक समीक्षामंजुल भारद्वाज की एक लघु कविता मंजुल भारद्वाज की एक लघु कविता 7 April 2026Pratibimb Media मंजुल भारद्वाज की एक लघु कविता व्यवस्था से हारी भीड़ जब गांव छोड़ शहर की ओर भागती है तब उसका लक्ष्य क्रांति नहीं सिर्फ़ पेट भरना होता है जिस दिन व्यवस्था से पलायन व्यवस्था निर्माण का संकल्प लेगा भारत में सिर्फ़ ग्राम स्वराज होगा! Post Views: 113 Like 0 0 Comments
जितेन्द्र धीर की कविता – कविता और जीवन विश्व कविता दिवस पर विशेष कविता और जीवन जितेन्द्र धीर कविता स्वप्न नहीं एक सच्चाई है आकाश इसकी…
जसवीर त्यागी की सात कविताएं जसवीर त्यागी की सात कविताएं इंसान ==== इंसान रोना चाहता है लेकिन अपार भीड़ में कोई कन्धा उसे नसीब नहीं…
मंजुल भारद्वाज की कविता- तर्कहीन सत्ता कविता तर्कहीन सत्ता मंजुल भारद्वाज ज़हन में सवाल हथौड़े मार रहा है क्या दुनिया वाक़ई पढ़ी लिखी है? …