Homeसाहित्य/पुस्तक समीक्षामंजुल भारद्वाज की एक लघु कविता मंजुल भारद्वाज की एक लघु कविता 7 April 2026Pratibimb Media मंजुल भारद्वाज की एक लघु कविता व्यवस्था से हारी भीड़ जब गांव छोड़ शहर की ओर भागती है तब उसका लक्ष्य क्रांति नहीं सिर्फ़ पेट भरना होता है जिस दिन व्यवस्था से पलायन व्यवस्था निर्माण का संकल्प लेगा भारत में सिर्फ़ ग्राम स्वराज होगा! Post Views: 62
रागनी का मास्टर, ग़ज़ल का आशिक : रामेश्वर दास गुप्ता 9-3-1951-18-8-2014 संस्मरण: रागनी का मास्टर, ग़ज़ल का आशिक : रामेश्वर दास गुप्त ओमसिंह अशफ़ाक जन्माष्टमी के दिन (18-8-2014) पिपली…
कार्ल सैंडबर्ग की कविताएं शिकागो और घास कार्ल सैंडबर्ग अमेरिका के एक महत्त्वपूर्ण कवि हैं। उन्हें हम जनवादी कवि कह सकते हैं। सैंडबर्ग ने शिकागो के बारे…
ओमप्रकाश तिवारी की कविता -आपको तय करना है आपको तय करना है ओमप्रकाश तिवारी आपको तय करना है क्या चाहिए आम या अमरूद चाहिए तो बाग बगीचा लगाइए …