Homeसाहित्य/पुस्तक समीक्षामंजुल भारद्वाज की एक लघु कविता मंजुल भारद्वाज की एक लघु कविता 7 April 2026Pratibimb Media मंजुल भारद्वाज की एक लघु कविता व्यवस्था से हारी भीड़ जब गांव छोड़ शहर की ओर भागती है तब उसका लक्ष्य क्रांति नहीं सिर्फ़ पेट भरना होता है जिस दिन व्यवस्था से पलायन व्यवस्था निर्माण का संकल्प लेगा भारत में सिर्फ़ ग्राम स्वराज होगा! Post Views: 91 Like 0 0 Comments
रवीन्द्रनाथ टैगोर की कविता युद्ध – जिस युद्ध में भाई भाई को मारता है युद्ध के विरुद्ध युद्ध – 5 युद्ध तो अपने आप में एक मसला है, वह मसलों का हल क्या देगा-…
ओमसिंह अशफ़ाक की कहानी : छोटे बाबू साहित्य में व्यंग्य की शुरुआत प्राचीन यूनानी और संस्कृत साहित्य से मानी जाती है। भारत में मध्यकाल में कबीर ने…
रमेश जोशी की कविता- बहुत जरूरी है… कविता बहुत ज़रूरी है… रमेश जोशी सुख के माथे दुक्ख दिठौना बहुत ज़रूरी है | नए जनम की खातिर…