Homeसाहित्य/पुस्तक समीक्षामंजुल भारद्वाज की एक लघु कविता मंजुल भारद्वाज की एक लघु कविता 7 April 2026Pratibimb Media मंजुल भारद्वाज की एक लघु कविता व्यवस्था से हारी भीड़ जब गांव छोड़ शहर की ओर भागती है तब उसका लक्ष्य क्रांति नहीं सिर्फ़ पेट भरना होता है जिस दिन व्यवस्था से पलायन व्यवस्था निर्माण का संकल्प लेगा भारत में सिर्फ़ ग्राम स्वराज होगा! Post Views: 77
राजनीतिक कैंसर है अवसरवाद लेनिन की पुण्यतिथि पर विशेष- राजनीतिक कैंसर है अवसरवाद जगदीश्वर चतुर्वेदी लेनिन का पाठ बार -बार अनेक मामलों…
खान मनजीत भावड़िया मजीद की छह कविताएं 1. घिरे हुए आज के समय में हम सब चारों ओर से घिरे पड़े हैं कोई बरोजगारी में…
राजेश भारती की कविता – पेट कविता पेट राजेश भारती पेट के लिए खेत जोता पेट के लिए मजदूरी की पेट के लिए गाली खाई…