भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत द्वारा एक मामले की सुनवाई के दौरान युवा वर्ग के प्रति कॉकरोच, परजीवी जैसी टिप्पणी ने देश से लेकर दुनिया भर में तूफान ला दिया है। वैसे तो सीजेआई ने बवाल बढ़ता देख सफाई दी कि उन्होंने फर्जी डिग्री से वकालत के पेशे में आ रहे लोगों के लिए टिप्पणी की थी, लेकिन मामला रुका नहीं। सीजेआई की टिप्पणी के दूसरे ही दिन एक युवक ने (पोलिटिकल स्टेटजिस्ट की पढ़ाई करने वाला) कॉकरोच जनता पार्टी नाम से एक संगठन बना लिया और अब एक हफ्ते के भीतर ही उसके डेढ़ करोड़ से अधिक फालोअर हो गए। उसका एक्स (ट्विटर) अकाउंट ब्लाक कर दिया गया। इसके बाद उसने कॉकरोच इज बैक नाम से दूसरा संगठन बना लिया। इस संगठन के चलते जो सनसनी फैली है, उसे लोग अपने अपने तरीके से समझने की कोशिश कर रहे हैं। उसमें से कुछ चुनिंदा टिप्पणियों को हम प्रतिबिम्ब पाठकों के समझ प्रस्तुत करेंगे। पहली टिप्पणी वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश की है जो उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर की है। हंमने उसे वहीं से साभार लिया है। संपादक
कॉकरोच जनता पार्टी’ पर नजर रखने की जरूरत
उर्मिलेश
अन्ना-केजरीवाल रहे हों या आज की ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ हो; हाल के वर्षों में ऐसे “स्वतंत्र अभियानों” के पीछे अक्सर कोई ‘योजना’ या कोई पूर्व-निर्धारित एजेंडा निकल आता है. जन-असंतोष का फ़ायदा उठाकर अपने को ‘फ्री थिंकर’ या ‘पूरी तरह स्वतंत्र’ बताने वाले ऐसे नवगठित संगठन पर्दे के पीछे के कुछ ताकतवर छुपे रुस्तमों का समर्थन पाकर मैदान में जम जाते हैं! अराजनीतिक मिजाज वाले या रंग-बिरंगे फ्री-थिंकर किस्म के ईमानदार लोग भी इनके मायाजाल में फंस जाते हैं! फिर ऐसे संगठन चुनाव जीतकर किसी क्षेत्र-विशेष में शासक-वर्ग की बी. या सी. टीम बनकर सत्तासीन हो जाते हैं. इनके उभार के समय ‘लिबरल्स’ और केंद्रीय सत्ता से नाराज मीडिया का एक हिस्सा इनके लिए नगाड़ा बजाता है! कुछ समय बाद पोल खुलने लगती है..फिर सारे नगाड़े चुप हो जाते हैं!
इसीलिए अन्ना-केजरीवाल के भ्रष्टाचार-विरोधी नियोजित अभियान से हम कत्तई प्रभावित नहीं हुए. क्योंकि जो सच श्रीमन प्रशांत भूषण जैसों को वर्षों बाद पता चला; वह मुझे कैंपेन के शुरू में ही पता चल गया था. इसका कारण ये नहीं कि प्रशांत भूषण से ज्यादा रिसोर्स-फुल आदमी हूं. कत्तई नहीं!
हमें असलियत पता चल गई क्योंकि हमारे मोहल्ले में ही उनका(अन्ना-केजरी वालों का) का एक बहुत महत्वपूर्ण Camp Office था. केजरीवाल से मेरी पहली मुलाकात वहीं दो बेड रूम के एक छोटे से फ्लैट में हुई थी! पहली मुलाकात में ही वह मुझे बेहद महत्वाकांक्षी, एरोगेंट, घुटा हुआ और अविश्वसनीय व्यक्ति लगा!
ऐसे कथित स्वतंत्र-चेता चेहरों के पीछे अक्सर कोई ‘ख़ूँख़ार योजना’ निकल आती है जो दशकों से बन रहे जन-असंतोष का फ़ायदा उठाकर शासकों की किसी B या C टीम को कुछ दिन के लिए सत्ता पर बिठा देती है! कुछ दिन तक लिबरल्स इनकी दुंदुभी बजाते हैं. फिर चुप हो जाते हैं!
इसलिये कॉकरोच जनता पार्टी(KJP) को भी पहले समझने की कोशिश करूंगा. सुना है, इंटरनेट से उतरकर उसके कुछ कर्ता-धर्ता हमारे बीच यानी समाज में अपनी भौतिक उपस्थिति बनाने की योजना बना रहे हैं.
कल उनका एक कथित मैनिफैस्टो दिखा. फौरन पढ़ गया! इसका पाठ संदेह जताने वाला है! संकल्प के एक पैरे पर मेरी निगाह टिक गई! एक पंक्ति भी बुदबुदाया: ‘आप लोग कौन हो भाई!’
इसलिए जांच-परख कर ही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पर बोलूंगा.
