ओमसिंह अशफ़ाक का गीत – कथा सुनो भाई, कथा सुनो! सब मेरे देश की व्यथा सुनो!

बोल-बम बोल-बम, बंदा रिक्शा खींच रहा है, क्यूं युवती कूड़ा बीन रही है, दिन बरजण के आन पड़े..जैसी लोकधर्मी कविताएं लिखने वाले हरियाणा के जन-कवि ओमसिंह अशफ़ाक अपने कबीराना अंदाज के लिए जाने जाते हैं। वे जनवादी-प्रगतिशील मूल्यों के जनपक्षधर रचनाकार हैं।
आज यहां प्रस्तुत है उनकी नवीनतम कविता–कथा सुनो! भाई, कथा सुनो!..यह कविता उन्होंने पिछले दिनों ‘जलेस’ द्वारा कुरुक्षेत्र में आयोजित कविता गोष्ठी में सुनाई थी। इसे हम यहां प्रतिबिंब-मीडिया के पाठकों के लिए भी प्रस्तुत कर रहे हैं….जयपाल

 

गीत

कथा सुनो भाई, कथा सुनो! सब मेरे देश की व्यथा सुनो!

ओमसिंह अशफ़ाक

कथा सुनो भाई, कथा सुनो!

सब मेरे देश की व्यथा सुनो!

———————————

1.

कौन हूं मैं और कहां से आया

भेद ना ये बुल्लेशाह भी पाया

ना तो मैं हूं कोई ज्ञानी-ध्यानी

ना करता हूं काम कोई शैतानी

बस गली़-गली़ गाता फिरता हूं

कभी उठता हूं कभी गिरता हूं

सब गिरने-उठने की व्यथा सुनो!

कथा सुनो भाई, कथा सुनो!!

2.

हूं तो मैं बस एक नागरिक

करता हूं जनता को जागरुक

अब रहा न कोई तपसी-ज्ञानी

सब घूम रहे मूरख-अभिमानी

ना रहा देश में साधु-महात्मा

मरती कुम्भ में देखी आत्मा

क्यूं मरी आत्मा ये व्यथा गुनो!

कथा सुनो भाई,कथा सुनो!!

3.

इब राग नया एक छेड़ा भाई

मरे भगदड़ में कहें मुक्ति पाई

बेमौत मरे जो मिलती है मुक्ति

तुम क्यों ना मरगे थे भाई !

जो मुक्ति खातिर गए थे कुम्भ में

क्यूं टेंन्टों भीतर छुपगे थे भाई!

मत बेईमानों की बात सुनो!

कथा सुनो भाई, कथा सुनो!!

4.

सच को खा गई झूठ की सत्ता

है लूट रही सब माल-मलित्ता

मीडिया बन गया ‘संघ का बाजा’

न्यूं अंधेर नगरी में चौपट राजा

अब सच की ना कोई बात करेगा

जो बोलेगा वो बेमौत मरेगा

अब उसी मौत की व्यथा सुनो!

कथा सुनो भाई, कथा सुनो!!

5.

‘संघ’ का देखो राज है आया

साथ कोढ़ के खा़ज भी लाया

पांच सैंकड़ा भवन ये बणगे

आलीशान होटल से तणगे

‘स्वयंसेवक’ उनमें ऐश करेंगे

हर अवसर को वे ‘कैश’ करेंगे

यही ‘राष्ट्रवाद’ की दिशा सुनो!

कथा सुनो भाई, कथा सुनो !!

6.

मत पूछो धन ये कहां से आया

‘अट्ठारह-18घंटे’ जाग कै कमाया..

थी घरकी ‘बही’ और चाचा लिखारी’

हमने थारी मत कहां मारी..?

थारी किस्मत में यो लिख राख़्या था

थारे भाग्य का बिगड़ा पड़्या खा़ता था?

इस बिगड़े खा़ते का हिसाब सुनो!

कथा सुनो भाई, कथा सुनो !!

7.

‘भैया जी’ हुए ‘भाई-साहब’ सब

करते ना कोई काम-काज अब

‘माल’ वे मोट्टा मार रहे हैं

हो ठेकेदार,सरकार रहे हैं

शासन-प्रशासन का हिस्सा हैं

अब लूट-तंत्र का वे किस्सा हैं

उस किस्से का इतिहास गुनो!

कथा सुनो भाई, कथा सुनो !!

8.

दिखे जल्दी वो दिन भी आवैगा

थारा खेत-क्यार भी ना पावैगा

कहीं भी काम मिलेगा कोन्या

यू मजदूर भी खड़्या लखावैगा

बद से बदतर हालात बणेंगें

थारे सूखे गात भी ख़ाक बणेंगें

उस बिगड़े हालात की फ़िक्र सुनो!

कथा सुनो भाई,कथा सुनो !!

9.

‘साधु-भेष’ में आया लुटेरा

सत्ता पर डाल लिया है घेरा

रावण वाली़ ये कहानी बणगी

दिखे बात जमीं रस्सी सी तणगी

सारी जनता को अब जागना होगा

होशो-हवास भी साम्भना होगा

जब टूटेगा यो साजिश का घेरा

फिर भाज्जेगा सत्ता छोड़ लुटेरा

 

“नयी रामायण” की व्यथा सुनो!

कथा सुनो भाई, कथा सुनो !!

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