जसवीर त्यागी की तीन कविताएं

जसवीर त्यागी की तीन कविताएं

हाथ

एक हाथ वे हैं
जो मरणासन्न आदमी में
ले आते हैं जीवन
दूसरे वे
जो मासूम निरपराध लोगों की
कर देते हैं निर्मम हत्या

एक हाथ वे हैं
जो चूल्हे में आग फूंकते हैं
दूसरे वे
जो एक ही झटके से
नष्ट कर देते हैं चूल्हे

एक हाथ वे हैं
जो इतिहास के पन्नों पर
लिखते हैं जीवन की कविता
दूसरे वे
जो इतिहास को
फेंक देते हैं समंदर में

दुनिया में दो तरह के हाथ हैं
एक वे जो निर्माण करते हैं
और दूसरे वे जो विनाश करते हैं

अपने दिल पर रखकर हाथ
सच-सच बताइये
आप
किस तरह के हाथ रखते हैं ?

मोची

ठसाठस भरी बसें
चमचमाती कारें
और चीखते-चिल्लाते स्कूटर
रोज निकलते हैं
उसकी आँखों के सामने से

लेकिन!चौदह-पन्द्रह साल का
वह सांवला लड़का
गर्दन झुकाये
चिपका रहता है किसी जूते पर

उसकी तल्लीनता देखकर
लगता है वह दुनिया का
सबसे व्यस्त मोची है

जिसे तनिक भी फुर्सत नहीं है
भागती हुई दुनिया को देखने की

हाँ! इतना ज़रूर है
जब कोई पैदल चलता राहगीर
निकलता है उसकी बगल से

लड़का चेहरा नहीं
पैरों की ओर देखता है
कातर निग़ाहों से

देखने वाले कहते हैं
राहगीर ने जूते पहन रखें हैं

लेकिन!चौदह-पन्द्रह साल के
मासूम मोची की निग़ाहों से देखिये
राहगीर ने जूते नहीं
दो रोटियाँ पहन रखी हैं ।

दड़बे की मुर्गियाँ

मुर्गियाँ बंद हैं दड़बे में
दड़बा बंद है
कसाई की हथेलियों में

मुर्गियाँ धीरे-धीरे घट रही हैं
और कसाई की हथेलियाँ
फैलती जा रही हैं

उनके सामने
फेंक दिया गया है दाना
मुर्गियाँ झपट रही हैं दानों पर

कसाई फेंक कर चार दानें
हर बार उठा लेता है एक मुर्गी

मुर्गियाँ नहीं समझ रहीं हैं
चार दाने और एक मुर्गी का गणित

कसाई के चाकू की चमक
गिर रही है मुर्गियों की गर्दनों पर

दड़बे की मुर्गियों
जागो,समझो,संभलो
और एकजुट हो जाओ

यह समय
दानों के लिए एक-दूसरे से
लड़ने झगड़ने का नहीं

यह समय है
दानों से बचने का।

 

कवि दिल्ली विश्वविद्यालय के राजधानी कॉलेज में हिंदी के प्रोफेसर हैं।