सरकारी स्कूलों को मजबूत करने के बजाय बच्चों को निजी स्कूलों की ओर धकेला जा रहा

सिरसा के गाँव घोड़ावासी में ‘सरकारी स्कूलों की बदहाली’ पर परिचर्चा

सरकारी स्कूलों को मजबूत करने के बजाय बच्चों को निजी स्कूलों की ओर धकेला जा रहा

  • भगतसिंह के जन्मदिवस (28 सितंबर) के अवसर पर डीवाईएफआई का आयोजन

  • स्कूल बचाओ अभियान की मांग — एक समान शिक्षा व्यवस्था लागू करो!

सिरसा। भगतसिंह के जन्मदिवस (28 सितंबर) के अवसर पर सिरसा के गाँव घोड़ांवाली स्थित ग्राम सचिवालय में नौजवान भारत सभा द्वारा ‘सरकारी स्कूलों की बदहाली के लिए जिम्मेदार कौन?’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसमें गाँव के अध्यापकों, नौजवानों और विद्यार्थियों ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर गहन चर्चा की।


युवा क्लब के साथी जतिन ने परिचर्चा के विषय और कार्यक्रम की रूपरेखा से सभी को परिचित कराया। कार्यक्रम के दौरान शहीद सुखदेव लाइब्रेरी के साथी गोर मान ने गाँव के युवा क्लब और स्कूली छात्रों को भगतसिंह के पोस्टर भेंट किए।
परिचर्चा के पहले सत्र में नौजवान भारत सभा (डीवाईएफआई) के साथी अजय आशु ने बताया कि हरियाणा के सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार घट रही है। वर्ष 2022 में 6 से 14 वर्ष के बच्चों में सरकारी स्कूलों का नामांकन 51.9 प्रतिशत था, जो 2024 में घटकर करीब 46 प्रतिशत रह गया। राज्य में 1,278 से अधिक स्कूल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। अनेक स्कूलों में कमरों, फर्नीचर, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, शौचालय और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। शिक्षकों को भी गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जाता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा कोई बाजारू माल नहीं, बल्कि हर बच्चे का अधिकार है। लेकिन निजीकरण बढ़ने के साथ बच्चों का भविष्य धीरे-धीरे उनकी आर्थिक स्थिति से जुड़ता जा रहा है। जिसके पास पैसा है, वह महँगे निजी स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ा सकता है, जबकि गरीब परिवार सरकारी स्कूलों की कमजोर होती व्यवस्था पर निर्भर है।
दूसरे सत्र में साथी कश्मीर सिंह ने कहा कि मौजूदा दौर में समस्या बच्चों या शिक्षकों में नहीं, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को पर्याप्त संसाधन न देने में है। चिराग और 134-ए जैसी व्यवस्थाओं के जरिए सरकारी स्कूलों को मजबूत करने के बजाय बच्चों को निजी स्कूलों की ओर धकेला जा रहा है। जरूरत सरकारी स्कूलों को बंद या कमजोर करने की नहीं, बल्कि उन्हें मजबूत करने की है। सभी रिक्त पद भरे जाएँ, पर्याप्त शिक्षक और संसाधन उपलब्ध कराए जाएँ तथा शिक्षा को निजी मुनाफे से मुक्त किया जाए।
उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि हर बच्चे को समान अवसर मिले और शिक्षा एक समान, गुणवत्तापूर्ण व निःशुल्क होनी चाहिए।
स्कूल बचाओ अभियान के तहत नौजवान भारत सभा सरकारी स्कूलों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर सर्वे, हस्ताक्षर अभियान तथा प्रदर्शन भी कर रही है। सही मायने में शहीद-ए-आज़म भगतसिंह को याद करने का उद्देश्य आज छात्रों और युवाओं के मुद्दों को लेकर आवाज उठाना तथा उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करना है।

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