महंगाई, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और साम्प्रदायिकता के खिलाफ़ एकजुट होने की जरूरत
रणबीर सिंह दहिया
बहनों और भाइयों,
आज देश के हालात गंभीर हो चले हैं। देश के तमाम साधन कुछ ही लोगों के हवाले कर दिए गए हैं। आम आदमी का जीवन बदहाल हो रहा है। आटा, दाल, चावल, तेल आदि के दाम आसमान छू रहे हैं।
मेहनतकश जनता की आय कम हो रही है और उसके खर्च बढ़ रहे हैं। हमारे प्रदेश की कुल आबादी 3 करोड़ 14 लाख है। इस आबादी का 40 प्रतिशत, यानी सवा करोड़ लोग 5 किलो अनाज की सरकारी स्कीम के मोहताज हैं। इनकी मासिक आय 13 हजार रुपए से भी कम है। इतनी कम आय वाले परिवारों के बच्चे अपनी शिक्षा भी बीच में ही छोड़ देते हैं और छोटे-छोटे धंधों में लग जाते हैं। बीमार हो जाने पर इन्हें इलाज नहीं मिलता। डॉक्टरों की फीस, दवा और टेस्ट आदि बहुत महंगे हैं। सही इलाज न मिलने पर अनेक लोग बेवक्त ही मौत का शिकार हो जाते हैं। मनरेगा जैसा कानून को बदलकर न्यूनतम रोजगार की गारंटी भी खत्म कर दी गई है। दिहाड़ी मजदूरी करने वाले लोगों के लिए काम नहीं है। दूसरी तरफ, प्रदेश के एक उद्योगपति ने पिछली तिमाही में 4696 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया है। हमें यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए दि बड़े उद्योगपतियों के इन मुनाफों से भारत विकसित नहीं हो जाता।
अगर हम अपने जिले रोहतक की बात करें तो बहुत निराश करने वाली तस्वीर सामने आती है। जिले की कुल आबादी लगभग 13 लाख है। इसमें 58 प्रतिशत ग्रामीण और 42 प्रतिशत शहरी आबादी है। जिले में शिक्षा और स्वास्थ्य की सबसे पुरानी और बड़ी दो संस्थाएं हैं जिनका नाम पूरे देश में स्थापित है। आज भी हजारों विद्यार्थी पढ़ते हैं और हजारों मरीज रोज इलाज के लिए आते हैं। लेकिन सरकार की नीति के कारण दोनों संस्थाओं में शिक्षकों और डॉक्टरों की आधी सीटें खाली पड़ी हैं। इसके चलते विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय तथा गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों का जीवन खतरे में रहता है। गरीबी के कारण लाखों लोग निजी अस्पताल में जा नहीं सकते।
जिले के 70 प्रतिशत परिवारों की आर्थिक स्थिति बहुत ही कमजोर है। इन परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपए से भी कम है। रोहतक में अनुमान के अनुसार 5 लाख से अधिक प्रवासी लोग हैं जो कुल आबादी का लगभग 40 प्रतिशत हैं। स्थानीय आबादी में किसानों की हालत भी बहुत खराब है। कृषि में लागत लगातार बढ़ रही है. लेकिन उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा। रोजगार के अवसर लगातार घट रहे हैं और बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है। जिले की बेरोजगारी दर शहरी क्षेत्र में 18 प्रतिशत से अधिक है। मेहनतकश आबादी की आर्थिक हालत बेहद चिंताजनक है और महंगाई भी बहुत अधिक है।
इन परिस्थितियों का सबसे बुरा असर महिलाओं पर हो रहा है। परिवार की तमाम जिम्मेदारी निभाने के लिए महिलाओं को अनेक तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं समाज में दोयम दर्जे की स्थिति बनी हुई है। यौन उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, बलात्कार और छेड़ छाड़ जैसी घटनाएं जिले में बढ़ रही हैं। खाप पंचायतें आज भी यह फरमान जारी करती हैं कि लड़कियां स्कूटर पर दोनों तरफ पांव करके नहीं बैठेंगी। ये तमाम बातें महिला विरोधी स्थिति को ही दिखाती हैं। जिले में अपराधों की संख्या भी बढ़ी है। एक ओर, आपसी दुश्मनी के चलते हत्याओं का ग्राफ बढ़ा है तो दूसरी ओर, दलित आबादी पर भी नफरती अत्याचार तेज हुए हैं। पिछले दिनों बनियानी और मदीना में दलित समुदाय पर हमले हुए। परिवारों को गांव छोड़ना पड़ा। शिक्षण संस्थानों में भी भेदभाव बना रहता है। दलित समुदाय के विद्यार्थियों को सरकारी सहयोग राशि भी कम मिलती है और समय पर भी नहीं मिलती। शहर में सफाई कर्मियों का भी शोषण होता है। उनकी जायज मांगें भी सरकार नहीं मान रही है।
नगरवासियों को अनेक समस्याओं का लगातार सामना करना पड़ता है। शहर में पीने के पानी की समस्या
और सीवर लीक होने की समस्या हमेशा रहती है। पार्कों और सड़कों का रखरखाव खराब हालत में है। जिले के कुछ लोग तमाम तरह के संसाधनों को खरीद रहे हैं। रोहतक की आबादी में धार्मिक अल्पसंख्यक, प्रवासी मजदूर. विकलांग व्यक्ति, खेत मजदूर, निर्माण मजदूर सफाई कर्मी, रेहड़ी-पटरी लगाने वाले तमाम लोग बहुत गरीबी में तो रहते ही हैं. साथ ही इनकी गरिमा भी बार-बार हमलों का शिकार होती है। देश की राजधानी के नजदीक होने के बावजूद रोहतक जिले की हालत खराब है। दरअसल देश की स्थिति में ही जिले की स्थिति भी शामिल है।
प्रांत और देश की भाजपा सरकार नवउदारवादी नीतियों को और अधिक गहरा कर रही है। इन नीतियों के चलते देश की सारी संपत्ति कुछ घरानों के पास जमा हो रही है। मेहनतकश आबादी महंगाई, बीमारी, असुरक्षा, गरीबी, कर्ज और बेरोजगारी की शिकार है। सरकार ने पिछले दिनों श्रम कानूनों से मिलने वाली सुरक्षा को कमजोर किया है। खाद्य और रोजगार सुरक्षा को कमजोर किया जा रहा है. सार्वजनिक संपत्तियों का निजीकरण किया जा रहा है तथा देश की संपदा और प्राकृतिक संसाधनों को कुछ चुनिंदा कॉरपोरेट घरानों के हाथों सौंपा जा रहा है। समाज को साम्प्रदायिक आधार पर बांटा जा रहा है. पड़ोसी को पड़ोसी के विरुद्ध खड़ा किया जा रहा है। नफरत फैलाने की राजनीति एक नए स्तर पर पहुंच चुकी है।
छात्र बढ़ती फीस और परीक्षा-पत्र लीक होने के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। युवा रोजगार के लिए संघर्षरत है। अगर युवा छात्र मिलकर संघर्ष करते हैं तो अपने अधिकारों को हासिल भी कर लेते हैं। इसी तरह मजदूर अपने अधिकारों और मजदूरी की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं। किसान अपनी उपज के लाभकारी मूल्य की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। महिलाएं हिंसा के विरुद्ध तथा पर्याप्त प्रतिनिधित्व के लिए आवाज उठा रही हैं। अन्य वंचित और हाशिए पर पड़े वर्ग भी अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए संघर्षरत हैं। लेकिन इन आवाजों को दबाने की कोशिश की जा रही है। लोगों को जेलों में डाला जा रहा है, जमानत से वंचित किया जा रहा है। लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमले किए जा रहे हैं और उन्हें कमजोर किया जा रहा है। संवैधानिक अधिकारों को सीमित किया जा रहा है तथा असहमति को अपराध बनाया जा रहा है।
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) हमेशा वंचित और शोषित तबकों के साथ खड़ी रही है। हम श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) के खिलाफ मजदूरों के साथ हैं। किसान विरोधी कानूनों के विरुद्ध किसानों के साथ हैं। मनरेगा (MGNREGA) की रक्षा के लिए ग्रामीण गरीबों के साथ हैं। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के अधिकारों के लिए संघर्षरत हैं। हम धर्मनिरपेक्षता और संविधान में निहित मूल्यों की रक्षा के लिए दृढ़तापूर्वक प्रतिबद्ध हैं।
इन संघर्षों में हमने हमेशा आम जनता के समर्थन पर भरोसा किया है। हमने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। हमने कभी किसी कॉरपोरेट घराने से सहायता नहीं मांगी और न ही स्वीकार की। हमने चुनावी बॉण्ड का विरोध किया और इसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में लड़ाई लड़ी। हम हमेशा जनता के साथ रहे हैं, उनके दर्द और पीड़ा को अपना समझा है तथा उनके सुख और उत्सवों में भी समान रूप से सहभागी बने हैं।
बढ़ती कठिनाइयों और संकटों के बीच हमें जनता के संघर्षों को और अधिक मजबूत करने का संकल्प लेना है। हमको अपने अभियानों का विस्तार करते हुए हर गांव, हर कार्यस्थल और हर मोहल्ले तक पहुंचना होगा ताकि एक लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और जनपक्षीय विकल्प के लिए एक शक्तिशाली जन आंदोलन का निर्माण किया जा सके।
