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ओमसिंह अशफ़ाक की दो लोक-कविताएं

ओमसिंह अशफ़ाक की दो लोक-कविताएं  राम की महिमा   राम तो घट-घट बसै,उसे नहीं किसी से बैर ! जो ‘बणज’…