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कुर्सी के नीचे दबा हुआ लोकतंत्र

कुर्सी के नीचे दबा हुआ लोकतंत्र रत्ना भदौरिया   बासाहेब से शिकायत है—आखिर यह कैसा लोकतंत्र है, जिसमें जनता अपने…

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मुनेश त्यागी की कविता – आजादी आजादी हां हर गुलामी से आजादी

कविता आजादी आजादी हां हर गुलामी से आजादी मुनेश त्यागी   लड़ के ली थी आजादी हम लेके रहेंगे आजादी,…