छोटे लम्हे, बड़ी सीख(10)

युवाओं, अब यह स्वतंत्रता की मशाल तुम्हारे हाथों में है। इसे केवल संभालना नहीं, और अधिक उज्ज्वल बनाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां गर्व से कह सकें - “हमारे पूर्वजों ने हमें आज़ादी दी थी, और हमने उस आज़ादी को सम्मान, एकता और कर्म से जीवित रखा।”

छोटे लम्हे, बड़ी सीख(10)

 डॉ रीटा अरोड़ा

1. दिखावे की खुशी

 

पड़ोसी ने पूछा- “आपके घर में सब इतना खुश कैसे रहते हैं?”

वह मुस्कुराकर बोली- “हम रोज तस्वीरें डालते हैं न!”

रात को तस्वीरों में मुस्कुराता परिवार अलग-अलग कमरों में सो गया।

मोबाइल पर लाइक्स बढ़ते रहे, घर में बातें घटती रहीं।

सीख: आज समाज में खुश दिखना आसान है, सच में खुश रहना मुश्किल

2. अंक और बच्चे

पिता ने पूछा-“बेटा, कितने प्रतिशत आए?”

बेटे ने सिर झुका लिया- “इस बार कम हैं।”

पिता बोले- “मुझे अंक नहीं, यह बताओ कि तुमने ईमानदारी से मेहनत की?”

बेटे ने पहली बार सिर उठाकर पिता की ओर देखा।

सीख: बच्चों का मूल्यांकन सिर्फ अंकों से नहीं, उनके प्रयास और ईमानदारी से भी होना चाहिए।

 

3. सास और बहू

सास बोली- “हमारे समय में बहुएँ घर का सारा काम करती थीं।”

बहू ने मुस्कुराकर कहा- “माँजी, आपके समय में बेटियाँ भी शायद इतना नहीं कमाती थीं।”

दोनों कुछ पल चुप रहीं।

फिर सास ने कहा—“चल, आज चाय मैं बनाती हूँ।”

सीख: पीढ़ियाँ बदलती हैं, तो रिश्तों को भी अपनी भाषा और अपेक्षाएँ बदलनी पड़ती हैं।

 

4. बेटा और पिता

पिता ने कहा- “बेटा, इस रविवार थोड़ा समय दे देना।”

बेटा बोला- “पापा, बहुत व्यस्त हूँ, अगले रविवार पक्का।”

अगले रविवार पिता अस्पताल में थे।

बेटे के पास समय था, लेकिन पिता नहीं।

सीख: जिन रिश्तों के लिए हम हमेशा “कल” बचाकर रखते हैं, कभी-कभी वही कल बहुत देर से आता है।

 

5. माँ और बेटी

माँ ने बेटी से कहा- “बेटा, अपने घर में सब सहती मत रहना।”

बेटी बोली- “माँ, आपने भी तो पूरी जिंदगी सहा है।”

माँ कुछ पल चुप रही, फिर बोली- “इसीलिए तो कह रही हूँ… मेरी कहानी मत दोहराना।”

सीख: माँ की पीढ़ी ने जो सहकर सीखा, अगली पीढ़ी का अधिकार है कि वह उससे बेहतर जीवन चुने।

 

 6. दादी और पोता

दादी ने पोते से पूछा-“बेटा, आज मेरे पास बैठोगे?”

पोता बोला- “दादी, गेम खत्म होने दो।”

कुछ देर बाद वह दौड़कर आया- “दादी, अब बैठूँ?”

दादी कुर्सी पर सो चुकी थीं।

सीख: स्क्रीन इंतजार कर सकती है, लेकिन अपनों के साथ बिताया बचपन और बुजुर्गों का समय वापस नहीं आता।

 

~ डॉ. रीटा अरोड़ा, सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर, करनाल

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