Blogसामाजिक/ सांस्कृतिक रिपोर्टसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

ऊपर भौतिक विकास : भीतर बौद्धिक ह्रास!

ऊपर भौतिक विकास : भीतर बौद्धिक ह्रास! शंभुनाथ लेखक को कभी समाज का बौद्धिक-नैतिक प्रतिनिधि माना जाता था। अब उसकी…

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उद्योगपति और व्यापारी हिंदी साहित्य से क्यों विमुख हो गए?

उद्योगपति और व्यापारी हिंदी साहित्य से क्यों विमुख हो गए? शंभुनाथ आधुनिक युग के आरंभ में, 19वीं सदी में ही…

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शंभुनाथ की कविता – हाथ

कविता हाथ शंभुनाथ   हाथ कंधे पर रखा मनुष्य का विश्वास है जब जुड़ते हैं प्रार्थना बन जाते हैं और…

आलेख विचारचुनावबंगाल केरल तमिलनाडु पुडुचेरी असमविधानसभा चुनाव

भेदभाव के उकसावे को अंततः पराजय का मुंह देखना पड़ता है

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नतीजे पर विशेष टिप्पणी भेदभाव के उकसावे को अंततः पराजय का मुंह देखना पड़ता है शंभुनाथ…

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शंभुनाथ की कविता – इन दिनों

कविता  इन दिनों शंभुनाथ   इन दिनों शब्द हैं जैसे बाढ़ में बहते हुए उखड़े पौधे जिनकी जड़ों में नहीं…

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विषमता के बोध की तुलना में वंचना का बोध पैदा करना ज्यादा आसान क्यों है?

विषमता के बोध की तुलना में वंचना का बोध पैदा करना ज्यादा आसान क्यों है?   शंभुनाथ   आखिर लोगों…

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दलित/पिछड़ा आंदोलन पर हिंदुत्ववाद का प्रभाव: कुछ सवाल

दलित/पिछड़ा आंदोलन पर हिंदुत्ववाद का प्रभाव: कुछ सवाल   शंभुनाथ   भारत में वर्तमान दौर के दलित/पिछड़ा आंदोलन पर हिंदुत्ववाद…