Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांत

ज्यों नावक के तीर: जयपाल की पांच कविताएं

ज्यों नावक के तीर: जयपाल की पांच कविताएं 1. प्रदूषण   बोली, भाषा, साहित्य सभ्यता, संस्कृति और इतिहास यह सच…

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मंजुल भारद्वाज की कविता- प्रकृति बिकाऊ नहीं है!

कविता प्रकृति बिकाऊ नहीं है! – मंजुल भारद्वाज आज हर मनुष्य को लगता है वो अपनी ज़रुरत की हर चीज़…