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जयपाल की छोटी-मोटी कविताएं

जयपाल की छोटी-मोटी कविताएं चिंता   दफ्तर के बाहर एक चपड़ासी बैठता है बड़े ज़ोर-ज़ोर से हँसता है ठहाके लगाकर…