जगदीश चंद्र को कई लोग भूल गए होंगे…मैं उन्हें नहीं भूल पाता

जगदीश चंद्र को कई लोग भूल गए होंगे…मैं उन्हें नहीं भूल पाता

मोहन मुक्त

… 1 September 2022 को उत्तराखण्ड के जाति आतंकियों ने प्रेम करने के लिए उनकी हत्या कर दी थी… हथौड़े से उनके शरीर की छब्बीस हड्डियां तोड़ दी गई थीं…
और अब केतन के साथ भी वही वीभत्सता हुई है… शरीर में कील ठोकने और नाखून उखाड़ने की बात सामने आ रही है
यातना की हद तक उन्हें तड़पाया गया था… और ये अपराध पेशेवर हत्यारों ने नहीं गाँव के सामान्य लोगों ने मिलकर किया है… ये पूरा मसला सांस्कृतिक है…
जगदीश और केतन न तो पहले दलित युवक हैं न आख़िरी जो ‘देवभूमि’ में प्रेम करने के कारण मारे गए…

प्रेम करने के लिए..???
हत्यायें हुई हैं सारी दुनिया में
दुश्मनी के कारण
और मैं मार दिया गया हूँ
प्रेम करने के लिये
मुझे अफ़सोस नहीं है
अपने प्रेम पर
अफ़सोस है कि
मैं चुप हूँ जब सवाल उठने लगें हैं
प्रेम पर ही
मैं कुछ कहना चाहता हूँ
लेकिन कैसे कहूँ
मेरे जबड़े की हड्डियां टूट गयी हैं
हथोड़े की चोटों से मेरी जीभ उलट कर मेरी सांस नली में जा फंसी है
प्रेम के पक्ष में फ़िर भी मेरे शब्द बाहर आना चाहते हैं
लेकिन ख़ून का तेज़ बहाव उन्हें धकेल रहा है
फेफड़े और पेट की तरफ़ दो अलग अलग रास्तों में
मेरा अपना ख़ून
मेरे प्रेम के ख़िलाफ़ हो गया है
प्रेम के ढाई अक्षरों मे से लगभग डेढ़ अक्षर दोनों फेफड़ों के जोड़ में अटके हैं
और लगभग एक अक्षर ख़ून के साथ पहुंच गया पेट में
पेट मेरा इस नाज़ुक वक़्त में भी चाहता है कि मुझे पोषण मिले
उसे जल्दी है कि मेरा ख़ून और प्रेम के अक्षर पच जाएं
एसिड उड़ेलता है वो उस पर
लेकिन एक तेज़ उबकाई के साथ मेरा ज़ेहन बचे खुचे प्रेम को बचाने की कोशिश करता है
जो बाहर की ओर आता है वो प्रेम नहीं है
वो उल्टी है
रास्ता नहीं मिलता उसे बाहर का
मुँह तो अब तक बचा ही नहीं
लेकिन प्रेम तो रास्ता ढूंढ़ता है ना
ख़ून और एसिड में सनी प्रेम के अक्षर की एक मात्रा फेफड़े की ओर बढ़ती है… जा टकराती है अटके हुए डेढ़ अक्षरों से
दर्द से बेहोश… अब प्रेम पूरा हुआ मैं सोचता हूँ
लेकिन मेरा दम घुट रहा है
प्रेम ने रोक दिया है मेरी सांस का रास्ता… तड़प रहा हूँ
आख़िरी कोशिश कि सांस छोड़ूँ
और प्रेम के पक्ष में अपना बयान ज़ारी करूँ
लेकिन ये तो कुछ और ही हो गया है
मैं शांत हूँ
दर्द ख़त्म
सारा दर्द ख़त्म…. प्रेम सांस की नली में है
लेकिन अब तो सांस की ज़रूरत ही नहीं
अरे
तो क्या मैं मार दिया गया हूँ
प्रेम करने के लिये…???

हम ख़त्म करेंगे से

मोहन मुक्त के फेसबुक से साभार

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