जसवीर त्यागी की बीमार और अन्य कविताएं
बीमार
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एक गरीब बीमार
गया डॉक्टर के पास
डॉक्टर ने किया परीक्षण
और जान लिया
कोई गम्भीर बीमारी नहीं
लेकिन!गम्भीर मुद्रा में
पर्चे में लिख दिए
कुछ ग़ैर ज़रूरी ‘मेडिकल टेस्ट’
परिणाम तय था
गरीब का और ज़्यादा
गरीब और बीमार होना
आप जनता-जनार्दन हैं
हैं ज्ञानी और समझदार
कीजिये न्याय
बीमार है कौन?
और किसे है?
इलाज की दरकार
तर्क की तुला पर तौलिये
सरकार कुछ तो बोलिये।
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अंकुर
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बरसात के बाद
नरम मिट्टी से
कुछ अंकुर
नभ की ओर
टकटकी लगाए झाँक रहे हैं
मानो नटखट बच्चे
पिता आसमान से पूछ रहे हों
क्या हम आ सकते हैं?
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देखना
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एक दिन उसने कहा-
तुम कम हँसते हो
हँसा करो खुलकर
सुंदर लगते हो
उसकी बात सुनकर
मैं हँस दिया
उसने मुझे
हँसते हुए देखा
मैंने उसे
मेरी हँसी की चिंता करते देखा।
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एकाकी
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अकेले सड़क पार करते हुए
डर लगता है
किसी का हाथ
हाथों में आ जाये
तो सुरक्षा का अहसास होता है
इस भागती-दौड़ती
पल-पल बदलती दुनिया में
किस के पास समय है?
जो थाम सके
किसी दूसरे इंसान का हाथ
खुद ही अपने एक हाथ से
संभालता हूँ अपना दूसरा हाथ
और एकाकी
करता हूँ अपना रास्ता पार।
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गूंगी
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कभी-कभी
लंबे समय तक
कोई बात नहीं होती
न खुद से
और न किसी दूसरे से
बात न हो पाए
यह बड़ा संकट नहीं
बड़ा संकट है
बात करने की चाह
गूंगी हो जाये।
