बाहर मतना जाइये खतरा सै

खरी खोटी

बाहर मतना जाइये खतरा सै

रणबीर सिंह दहिया

बन्ता अखबार पढ़ण लागर्या था। उसमैं पढ्या अक फलाणे गाम मैं फलाणे कै घरां फलाणे नै फलाणे की छोरी गेल्यां जोर जबरदस्ती करण की कोशिश करी। दूसरी खबर थी अक फलाणे गाम मैं फलाणे माणस नै फलाणे की बहू गेल्यां फलाणे के खेतां मैं काला मुंह कर्या। तीसरी खबर थी अक फलाणे शहर मैं फलाणे मोहल्ले की 10 साल की बच्ची गेल्यां बलात्कार हुया।

इतनी वार मैं सन्ता बी उड़ै आग्या तो बन्ते नै बोल्या – सुणा के खबर सैं बन्ते? बन्ते नै सन्ते ताहिं अखबार का पहलड़ा पेज पकड़ा दिया। वे सारी खबर पढ़ कै सन्ता बोल्या – भाई कोए चाहे बुरा मानो चाहे भला मानो पर बलात्कार घणे होवण के दो कारण सैं। बन्ते का ध्यान उस कान्ही गया। सन्ता बोल्या – एक तो ये लुगाई नौकरी करण के चक्कर मैं जिब तै बाहर जावण लाग्गी सैं जिब तै बलात्कार फालतू होगे। दूसरा इस फैशन नै म्हारे देश का टिब्बा कर दिया। जिब तै ये छोरी अर बहू फैशन करकै बाहर लिकड़ण लाग्गी सैं, ये जीन पहर कै सड़कां पै घूम्मण लाग्गी सैं जिबे तै ये बलात्कार फालतू होगे।

और बी दो तीन लड़धू बैठे थे वे भी छूटदे की साथ बोले – संता कति सोला आने सही बात कैहर्या सै। आज काल की छोरी काबू ए मैं कोण्या रही। इनका घणा पां लिकड़गा, ज्याहे तैं ये इस ढाल की घटना फालतू होवण लागगी। एक लड़धू बोल्या – तो के इलाज हो इसका? सन्ता बोल्या – इलाज तो जिबे हो सकै सै जिब ये बहू अर छोरी घर तै बाहर पां नहीं धरैं।

इतनी वार मैं ज्ञान विज्ञान आला राजेश बी आग्या, ओ बी उनकी बात सुणण लागग्या। बन्ते धोरै रहया नहीं गया ओ बोल्या रै सन्ते तेरी बात किमै जंची कोण्या। सन्ता टूट कै पड़्या – क्यूं जंचण मैं के कसर सै। या सारी दुनिया तो न्यों ऐ रूक्के मारै सै अक इन बीर बाणियां का घर तै बाहर पां लिकड़ग्या ज्यां तै बलात्कार बधगे। बन्ता बोल्या – भाई सन्ते ठाड्डू मतना बोलै। तनै अपनी बात पूरी कैहली अर हमनै शांति तै तेरी बात सुनी। ईब तू औरां की बात बी आराम तै सुण। राजेश बोल्या – बात सही सै भाई।

हां बन्ते बता तूं अपणी बात बता। बन्ता बोल्या – आज के अखबार मैं पांच बलात्कारां की कै छेड़खानी की खबर छपी सैं। इनमां तै दो तै दो गामां मैं घरां मैं धिंगताणे बड़कै करी ओड़ घटना सैं। सन्ता न्यूं कहवै सै अक ये लुगाई जीन का फैशन कुढ़ाला करण लागगी ज्यां तै बलात्कार की घटना बधी सैं। फेर इस अखबार मैं आज ये छपी पांच खबर तै इसकी बातां की ताईद कोण्या करती। इन पांचों बलात्कारां का ना तो फैशन गेल्यां कोए संबंध अर ना बाहर जा कै नौकरी करणे तै कोए मतलब। अर ये जितने रलधू आड़ै बैठे सैं ये भी इस सन्ते की हां मैं हां मिलावण लागगे।

एक रलधू बोलया – हमनै के बेरा म्हारे सोनीपत के कॉलेज का म्हारा टीचर सै ओ न्योए कहवै था। बन्ता बोल्या – हाथ कंगन ने आरसी के अर पढ़े लिखे नै फारसी के। एक दिन की पांच खबरां मैं तो या बात गलत पाई गई सै आपां एक हफ्ते के अखबारां की रिपोर्ट कट्ठी करकै देखल्यां उनमैं भी मेरी आली बात सही पावैगी अर बलात्कारां का जीन के फैशन तै अर लुगाई के नौकरी पै जावण तै कोए ताल्लुक नहीं सै।

सन्ता फेर तमतमा कै बोल्या – मैं तो फेर बी कहूं सूं अक जै लुगाई घर तै बाहर नौकरी खात्तर नहीं जान्ती तो उसपै बलात्कार नहीं होन्ते। अर इस फैशन नै बी जलती आग मैं घी का काम कर्या सै।

बन्ता बोल्या – भाई सन्ते तू ठाड्डा सै, तेरा रूतबा सै, तूं पीस्से आला सै, ज्यां तै ये रलधू बात तो तेरी ए मानैंगे फेर इसका मतलब यो बी नहीं सै अक तेरी बात साच्ची ए सै। साच्ची बात तो सै मेरी फेर तूं मान चाहे मत मान। एक दिन मनै अखबार मैं या बी पढ़ी थी अक बच्चियां गेल्यां बलात्कार उनके पड़ौसी कै रिश्तेदार करणिया फालतू सैं। अर उस अखबार मैं न्यों भी लिख राखी थी अक घर की चारदिवारी मैं भी महिला पै खूबै अत्याचार होवैं सैं।

अब बलात्कार की घटना बी घर परिवार में घाट ना होन्ती। सन्ता जो बात कहवै सै ना अक बीरबानी बाहर लिकड़ी ज्यांते यो हुया पर ये घर मैं भी सुरक्षित नहीं सैं। खबरां के हिसाब तै दो महिलावां गेल्यां तो उनके घर मैं ए बलात्कार हुये। तो मामले की जड़ डूंघी सै। औरत नै घर की चारदीवारी मैं बन्द करकै इस समस्या का समाधान मनै तो दीखदा कोण्या। बाकी सन्ता फेर बी जै औरतां नै घर मैं कैद करणा चाहवै सै तो इसकी मर्जी। बलात्कार का ताल्लुक बाहर अर भीतर तै नहीं सै कई और बातां तै सै। बाहर के भीतर औरत सुरक्षित कितै बी कोण्या। क्यूं? इसका जवाब चाहिये।

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