लुंगी में लोकतंत्र 

लुंगी में लोकतंत्र

रमेश जोशी

तोताराम ने हमारी बात को तरजीह देते हुए कहा- तो आज चल ही आते हैं निर्वाचन कार्यालय में मतदाता सूची में अपना नाम देखने के लिए ।

हमने भी तसदीक करते हुए कहा- अब लू का डर तो रहा नहीं । ले ये दो प्याज तो अपनी जेब में रख ले और दो हम और निकाल लेते हैं ।

बोला- कोई पेंट शर्ट तो डाल । ऐसे चलेगा क्या लुंगी में ही ।

हमने कहा- वैसे बुराई तो इसमें भी कुछ नहीं है ।

बोला- है । वह जमाना गया जब गाँधी आधी धोती में ब्रिटेन के महाराजा से मिलने चले गए थे । यह मोदी जी और शाह साहब का राज है । अब वोट डालने का भी ड्रेस कोड हो गया है । तभी बंगाल के एक मतदान केंद्र पर सुरक्षा बलों ने लुंगी वाले गणेश मजूमदार और अली मण्डल को रोक दिया । जब पेंट शर्ट पहनकर आये तब वोट डाल सके । कुछ तो खयाल रखा जाना चाहिए शालीनता और संस्कारों का । यह तो सुरक्षा बलों की सज्जनता है जो ए आई सम्मिट के शर्टलेस प्रदर्शकरियों की तरह जेल में नहीं डाला । अगर निर्वाचन विभाग वाले बंगाल वाले सुरक्षा बालों की तरह संस्कारी और शालीन हुए तो तेरा वोट ही स्थायी रूप से काट देंगे ।

हमने कहा- तमिलनाडु और केरल में तो लोग सभी जगह लुंगी में चले जाते हैं । हम भी जब पोर्टब्लेयर में थे तो लुंगी में बाजार चले जाते थे । वहाँ के नमी और गरमी वाले जलवायु में यह एक बहुत बढ़िया पहनावा है । फटाफट सूख जाती है और इस्तरी करने की भी कोई जरूरत नहीं । हमारे विद्यालय प्रबंध समिति में चेयरमैन वहाँ के शिक्षा सचिव चारी साहब एक बार आये तो वे लुंगी और हवाई चप्पल पहने हुए थे । और उनकी पत्नी तो बिना चप्पल के ही थीं । कांग्रेस अध्यक्ष के कामराज तो हमेशा ही लुंगी पहनते थे ।

बोला- यह कांग्रेस का कामराज नहीं, मोदी जी का रामराज है ।

हमने कहा- रामराज में तो राम को हमने नंगे पाँव और एक धोती में वन वन भटकते देखा है । हनुमान जी भी एक छोटे से कपड़े की लंगोटी में ही रहते हैं । आर एस एस को भी फुल पेंट 2016 में तब उपलब्ध हुई जब मोदी जी ने उसे हजारों करोड़ के चंदे और हर प्रकार के ऑडिट से मुक्त बना दिया । संघ में सर संचालक सुदर्शन जी को हमने कई बार हाफ पेंट में, हिटलरी मुद्रा में नमस्ते सदा वत्सले गाते देखा-सुना है । हालाँकि हमें बड़ा अजीब लगा । बुजुर्ग को कम से कम धोती ही पहना देते लेकिन क्या करें गण के वेश की गरिमा से बंधे हुए थे ।

और जब मोदी जी ने महाबलीपुरम में जिन पिंग का स्वागत किया था तो लुंगी में ही तो थे । क्या वोट डालना इससे भी बड़ा औपचारिक आयोजन है । यह कोई ओबामा को चाय पिलाना थोड़े ही है जो 15 लाख का सोने के तारों से काढ़ा अपने नाम वाला सूट पहना जाए ।

बोला- लुंगी होती है सस्ती, चारखाने वाली, गरीबों की जिसे केरल में मुंडू और तमिलनाडु में कैली कहते हैं

संभ्रांत लोगों वाली महंगी होती है उसे वेष्टि कहते हैं । मोदी जी वाली लुंगी नहीं, वेष्टि है , महंगी । मोदी जी तो इतने सभ्य हैं कि गंगा स्नान भी पांचों कपड़ों में करते हैं । कभी अभिमान में भरकर भी अपना 56 इंची सीने का भद्दा या शालीन कैसा भी प्रदर्शन नहीं किया ।

हमने कहा- वैसे बंगाल के चुनावों के निवृत्त होते ही मोदी जी ने जिस शिव का त्रिशूल लिए डमरू बजाते हुए बनारस में फ़ोटो खिंचवाया वे तो दिगम्बर हैं निर्वस्त्र ,लुंगी भी नहीं । क्या उन्हें बनारस से निकाल दोगे । जो निर्वस्त्र रह सके वही शिव हो सकता है । सम्पूर्ण पारदर्शी । कोई एप्सटीन फ़ाइल नहीं । कोई भी कर ले जांच । किसी ट्रम्प और नेतनयाहू का कोई डर नहीं ।

शिव या महावीर वस्त्रों की कमाई नहीं खाते । वे सबके कल्याण अपने शिवत्व के कारण जाने जाते हैं, सूटबूट के कारण नहीं ।

वैसे राष्ट्र की सुरक्षा के लिए लुंगी उतरवाना ठीक नहीं क्योंकि लुंगी के बिना घुसपैठियों की पहचान करके उन्हें निकालेंगे कैसे ?

फिर भी सोच किसी 70-80 वर्ष के बुजुर्ग को केवल लुंगी पहनने मात्र के लिए इस तरह लज्जित करना उचित है ?

बोला- मास्टर, लोकतंत्र की रक्षा के बहुत कुछ करना पड़ता है । लोकतंत्र और वह भी मदर ऑफ डेमोक्रेसी का ।

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