Blogसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

चुप्पियों को प्रतिकार में परिवर्तित करने की प्रत्याशा

 विजय शंकर पांडेय बरबस बशीर बद्र की यह पंक्तियां याद आ रही हैं, ‘अगर फ़ुर्सत मिले पानी की तहरीरों को…

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राजनीतिक फिल्मों की अराजनीतिक समीक्षा के टिप्स!

महेश राजपूत 1. स्पष्ट कर दें कि फिल्म के कथित विवादास्पद पहलुओं जैसे राजनीति, सांप्रदायिकता, स्त्रीद्वेष, पितृसत्ता आदि आदि से…

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जनवादी लेखक संघ ने कला और अभिव्यक्ति की आजादी पर हो रहे हमलों की निंदा की, कड़ी कारवाई की मांग

जलेस महाराष्ट्र ने जारी की प्रेस रिलीज इस महीने की 2 फरवरी को सवित्रीबाई फुले, पुणे विश्वविद्यालय के ललित कला…

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एक कर्मचारी की डायरी : समय के ​शिलापट पर अमिट चित्रकारी

नाटककार, कहानीकार रणविजय सिंह सत्यकेतु का कविता संग्रह ‘एक कर्मचारी की डायरी’ न्यू वर्ल्ड  -ओमप्रकाश तिवारी प​ब्लिकेशन नई दिल्ली से…