कविता
मैं तानाशाह नहीं हूँ
जयपाल
मेरे देश के पथभ्रष्ट छात्रों
तुम मुझे तानाशाह कहते हो
यह ठीक नहीं है
मेरी शक्ल किसी तानाशाह से नहीं मिलती
इसके विपरीत संत महात्माओं से मिलती है
तानाशाह तो अहंकारी होते हैं
जबकि मैं हमेशा विनम्र रहता हूं
वे दूसरों पर क्रोध करते हैं
मैं सब पर दया करता हूं
वे कोट-पैंट पहनते हैं
मैं धोती-कुर्ता पहनता हूँ
वे मीट-मच्छी खाते हैं
मैं शुद्ध शाकाहारी हूँ
वे पूजा-पाठ नहीं करते
मैं दोनों वक्त पूजा करता हूँ
वे संविधान को नहीं मानते
मैं तो संविधान को सिर पर रख कर चलता हूं
वे हिंसा में विश्वास रखते हैं
मैं तो अहिंसा का पुजारी हूं
मेरे देश के पथभ्रष्ट छात्रों !
समय रहते सुधर जाओ !!
नहीं तो कानून अपना काम करेगा
इसे धमकी मत समझना
मैं किसी को धमकी नहीं देता
प्रार्थना करता हूं !
