कविता
हम चंदा तारे दिनमान बनें
मुनेश त्यागी
इस अंधकार के मौसम में
हम चंदा तारे दिनमान बनें,
हिंसा नफरत के माहौल में
हम होली और रमजान बनें।
वैज्ञानिक सोच में वृद्धि हो
धनिया सुखिया की बात चलें,
बेटी बहुओं को मान मिले
और मातृ-पितृ सम्मान बढे।
हिंदू मुसलमान साथ चलें
और भाई चारे की बात बने ,
जनता का खून पीते हैं
हम ऐसे ना धनवान बनें।
हिंसा के पुजारी ठहरे वो
हम अमन के पहरेदार बनें,
रोजी रोटी और शिक्षा की
गारंटी का संविधान बने।
उस माहौल की बात करें
जहां मेलजोल की राह बने ,
जन-मुक्ति के सपने देखें
हम क्रांति का नवगान बनें।
