डॉ रीटा अरोड़ा की कविता – बस हाथ में हाथ रख …

युवाओं, अब यह स्वतंत्रता की मशाल तुम्हारे हाथों में है। इसे केवल संभालना नहीं, और अधिक उज्ज्वल बनाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां गर्व से कह सकें - “हमारे पूर्वजों ने हमें आज़ादी दी थी, और हमने उस आज़ादी को सम्मान, एकता और कर्म से जीवित रखा।”

कविता

बस हाथ में हाथ रख …

डॉ रीटा अरोड़ा

 

कभी किसी के साथ बैठकर

उसकी ख़ामोशी बाँटकर देखिए,

उसकी रूह का सुकून

जानकर देखिए।

 

आपका न बोलना,

उसके हाथ को हाथ में लेकर बैठना-

उसको कितना सुकून देता है,

कभी महसूस करके देखिए।

 

उसको यह एहसास देता है-

“कोई है मेरा…”

 

आपकी मौजूदगी का एहसास

उसके ग़म को भुला देता है।

 

आपका उसके लिए मौजूद रहना,

बस इतना कहना-

 

“मैं हूँ ना…”

 

पल में

उसके सारे दर्द हर लेता है।

 

कभी किसी को

ऐसा सुकून देकर देखिए…

बिना कुछ कहे

उसके दिल को समझकर देखिए।

 

~डॉ रीटा अरोड़ा, सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर करनाल।

Comments

Your email address will not be published.

0