स्थायी सत्ता केवल दमन से नहीं, विचारधारात्मक नेतृत्व और सांस्कृतिक प्रभुत्व से चलती है
एंटोनियो ग्राम्शी
कल्चरल हेजेमनी का सिद्धांत एंटोनियो ग्राम्शी (1891–1937) ने विकसित किया। वे एक इतालवी मार्क्सवादी दार्शनिक और राजनीतिक विचारक थे।
1921 में Italian Communist Party (PCI) के संस्थापकों में से एक थे। 1924–1926 के बीच वे पार्टी के महासचिव (General Secretary) भी रहे। वे इटली की संसद के सदस्य (Deputy) भी चुने गए थे।
उनके विचार मार्क्सवाद में मौलिक योगदान माना जाता है। तोगलियती,हॉब्सबॉम , अल्तुसर, पैरी एंडरसन जैसे नामचीन मार्क्सवादी विचारक के साथ ही पूंजीवादी विचारकों ने उनमें रुचि ली और उनके द्वारा प्रस्तुत जटिल विचार शब्दावली 1960 से फैलते हुए यथार्थ के अकाट्य प्रमाणीकरण की स्पष्ट मानक भाषा मानी गई। अकादमिक जगत से लेकर कम्युनिकेशन मास मीडिया और, सांस्कृतिक राजनीतिक में उनकी दी गई टर्मिलोजी चलन में बनी हुई है।
सत्ता से उनका आशय सीधा फासिस्ट राज का संदर्भ था क्योंकि वो फासिस्ट राज के बंदी कैदी के रूप में 20 साल की जेल में थे , जिनमें से से 11साल बीता कर मरने की हालत में ही छोड़े गए और आने के कुछ समय में ही मर गए।
“प्रिजन नोट्स” नामक ऐतिहासिक पुस्तक को जेल में ही लिख। यह 31 नोट बुक का कलेक्शन है।
उनक जाने के बाद उनका योगदान सामने आया। 1947में उनकी मृत्यु के 10 साल बाद ये पुस्तक प्रकाशित हुई ओर दुनिया को -सर्वहारा को एक शानदार दृष्टि का हथियार मिला!
ग्राम्शी के अनुसार हेजेमनी का अर्थ केवल बलपूर्वक शासन नहीं है।शासक वर्ग अपनी सत्ता को सहमति (consent) के माध्यम से भी कायम रखता है।
यह सहमति शिक्षा, धर्म, मीडिया, संस्कृति, साहित्य, परिवार और अन्य सामाजिक संस्थाओं के जरिए बनाई जाती है।
इसलिए लोग कई बार अपनी ही अधीनता को फासिस्ट सत्ता समर्थक व्यक्ति/विचार/व्यवहार को , स्वाभाविक या उचित मानने लगते हैं।
ग्राम्शी ने मार्क्सवाद के अनुसार उन्होंने राज्य को दो भागों में समझा:
राजनीतिक समाज (Political Society) – पुलिस, सेना, न्यायालय आदि, जहाँ आवश्यकता पड़ने पर बल प्रयोग होता है।
नागरिक समाज (Civil Society) – स्कूल, विश्वविद्यालय, मीडिया, धार्मिक संस्थाएँ, परिवार, सांस्कृतिक संगठन आदि, जहाँ विचारों और संस्कृति के माध्यम से सहमति बनाई जाती है।
ग्राम्शी का मानना था कि किसी भी शासक वर्ग की स्थायी सत्ता केवल दमन से नहीं, बल्कि विचारधारात्मक नेतृत्व (ideological leadership) और सांस्कृतिक प्रभुत्व (cultural hegemony) से चलती है।
