जसवीर त्यागी की कविताएं

जसवीर त्यागी की कविताएं

बच्चों की लड़ाई

खेल-खेल में
छोटे बच्चों की लड़ाई हो गयी

एक बच्चे ने
दूसरी बच्ची से कहा-
तुम्हें ठीक कर दूँगा

श्रोता बच्ची बोली-
ठीक तो तब करोगे
जब में खराब हूँगी
मैं तो पहले से ही ठीक हूँ

उत्तर सुनकर
सारे बच्चे हँस पड़े

हँसी की चिकनाहट में
लड़ाई फिसलकर गिर पड़ी

सोचता हूँ
दुनिया की सारी लड़ाइयाँ
बच्चों की तरह होती
तो यह दुनिया कितनी सुंदर होती।

जन्म

 

एक दिन पेड़ से
किसी पत्ते-सा टूटकर
धरा पर गिरूँगा मैं
समय सोख लेगा
बची-खुची हरीतिमा भी

डाल से टूटे हुए पत्ते को
हवा उठा लेगी अपनी गोद में
और ले जाकर छोड़ देगी
किसी निर्जन स्थान पर
अज्ञात में पड़ा-पड़ा पत्ता
अकेलेपन के प्रहार से टूटेगा कई बार

फिर उड़ता हुआ कोई पंछी
आयेगा किसी दिन
उठा लेगा टूटे पात को अपनी चोंच में
ले जायेगा किसी हरे भरे पेड़ की डाल पर
बनायेगा अपने अजन्मे शिशुओं के लिए एक घरौंदा

इस तरह नवजात शिशुओं के जन्म के साथ-साथ
जन्म लेगा
डाल से टूटा हुआ पत्ता भी फिर एक बार।

प्रेम की हँसी

कई दिनों से
वह बुखार में है

उसके हाल-चाल पूछता हूँ
वह कहती है-
बाकी सब तो ठीक है
कमज़ोरी बहुत है अभी

सुनकर कुछ देर
हम दोनों मौन रहते हैं
भावनाएँ परस्पर संवाद करती हैं

मैं बोलता हूँ
कमज़ोरी चली जाएगी
अपना ध्यान रखिए

वह मुस्कुराती हुई कहती है
मैं तो बीमार हूँ
अपना ध्यान कैसे रखूँ?

तुम हो तो
मेरा ध्यान रखने के लिए
सुनकर हम दोनों एक साथ हँसते हैं

प्रेम की हँसी
कमज़ोरी दूर करती है।

कवि जसवीर त्यागी दिल्ली विश्वविद्यालय के राजधानी कॉलेज में हिंदी के प्रोफेसर हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *