मुनेश त्यागी की कविता – अब तो क्रांति ही करेंगे, लोग मेरे देश के 

कविता

अब तो क्रांति ही करेंगे, लोग मेरे देश के

 मुनेश त्यागी

 

बिन लड़े कुछ नहीं मिलता यह जानकर,

अब लड़ाई लड़ रहे हैं, लोग मेरे देश के।

जिन्होंने मंजिल पर लुटवाए थे काफिले

उनको पहचान गए हैं, लोग मेरे देश के।

 

विकास के नाम पर, कर दिया है विनाश

उनसे अब दूर हट रहे हैं, लोग मेरे देश के।

लूट ली है शिक्षा और छीन लिए हैं रोजगार

उनसे अब दूर भाग रहे हैं, लोग मेरे देश के।

 

जो ना किसानों के हैं और ना मजदूरों के हैं

उन्हें अब तलाक दे रहे हैं, लोग मेरे देश के।

जो मारपीट रहे हैं छात्रों और नौजवानों को

उनसे तो अब बदला लेंगे, लोग मेरे देश के।

 

लेकर मशालें हाथों में, मिटायेंगे अंधेरों को

पूरे देश को रोशन करेंगे, लोग मेरे देश के।

ना तो पुलिस से डरेंगे, ना ही गोली से डरेंगे

अब सड़क पर ही भिडेंगे, लोग मेरे देश के।

 

तोडेंगे शिकंजा शोषण जुल्म अन्याय का

भाईचारा कायम करेंगे, लोग मेरे देश के।

बदलेंगे सरकार और सत्ता के गुरूर को

अब तो क्रांति ही करेंगे, लोग मेरे देश के।

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