मुनेश त्यागी की कविता – किताब हमारी सबसे अच्छी दोस्त 

कविता

किताब हमारी सबसे अच्छी दोस्त

मुनेश त्यागी

 

किताब…

सिखाती है हमें ज्ञान और विज्ञान,

समझाती है कारण, बदहाली का,

सिखाती हैं बनाना हमें संगठन

सारी जनता की पूर्ण मुक्ति का।

 

किताब…

देती है गुर, नर-नारी समानता का,

पढ़ने लिखने की संस्कृति का,

लघु परिवार की जरूरत का,

एक बेहतर समाज बनाने का।

 

किताब…

देती है मंत्र हम सबको,

विकास में हिस्सेदारी का,

समाज के प्रति दायित्व का,

भाग्यवाद से छुटकारा पाने का।

 

किताब…

देती है हौसला हम सबको,

चार दिवारी से बाहर आने का,

जगाती है इच्छा लोगों में

पढ़ने की और सीखने की।

 

किताब…

तोड़ती है क्रूरतम शिकंजा

पोंगा पंडितों का, जादू टोनों का,

कर डालती है मोह भंग

तांत्रिक विज्ञान का, भूत और प्रेत का।

 

किताब…

बदलती है सलीका

प्यार से रहने का और सहने का,

तोड़ती है पूरा का पूरा शिकंजा

कुरीतियों का, अज्ञान का, साजिशों का।

 

किताब…

करती देती है पूरा भंडाफोड़

शोषण का, लूट का, हड़पने का,

देती है मंत्र सारी दुनिया को

संगठित होने का, नव जन सृजन का।

 

किताब…

देती है हौंसला लड़ने का,

लूट के किले गिरने का,

दिखाती है मार्ग हमें

मुक्ति का, बदलाव का।

 

किताब…

सिखाती है सलिका हमें

बेहतर इंसान बनने का,

देती है स्वर हमें आपसी भाईचारे का

संघर्ष का, विद्रोह का, इंकलाब का।

 

किताब…

लोग धोखा दे सकते हैं

पर किताबें तो कभी नहीं,

किताबों को रखिए अपने पास

किताबें होती हैं सबसे अच्छी दोस्त।

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