रणबीर सिंह दहिया की दो कविताएं

रणबीर सिंह दहिया की दो कविताएं

आने वाला समय

 

दो हजार तीस के आते आते सुनते जाओ

चार सौ पचास पी पी एम वी ग्रीन हाउस गैस

हमारे चारों ओर वातावरण के अंदर घुलेगी

दो दशमल पांच डिग्री तापमान बढ़ जाएगा

समुंद्री सतह ऊपर उठ जाएगी मेरे यारो

मालदीव जैसे टापुओं को पूरी तरह डुबाएगी

बाद ग्रस्त इलाके बन जाएंगे कई महा नगर

फसलों की पैदावरवमें भी कई बदलाव आयेंगे

भारत में गेहूं चावल चालीस प्रतिशत तक

कम पैदा होंगे और भारतवासी भूखे चिल्लायेंगे

इस सदी केंवट तक ग्रीन हाउस गैसें यारो

पांच छह सौ पीपीएमवी तक बढ़ जायेंगी

चार पांच डिग्री तक तापमान को भी बढ़ाएंगी

जिसके चलते पृथ्वी जीवन पर संकट मंडराएगा

सोचो कुछ तो सोचो अभी भी वक्त है यारो
———————–

नई भुनभुनाहट

 

वैश्विक गर्मी यह शब्द बिल्कुल्ल

नई भुनभुनाहट है जो ठंड में रजाई

ओढ़कर गर्म होने जैसा कुछ आभास

देता है पर मानल जाति आज जिस

चुनौती का सामना कर रही है यारो

यह उसकी भयानकता का वर्णन

कर पाने में नाकाफी है मेरे दोस्तों

जलवायु परिवर्तन की जगह पर यदि

जलवायु संकट का प्रयोग करें तो ज्यादा ठीक होगा।

जलवायु संकट एक नंगा सच है,

हिमयुग के बाद पहली बार आया है

यह संकट मानव जाति के समक्ष

ग्रीन हाउस गैसेजका बढ़ते जाना

खासतौर पर पर कार्बन डायआक्साइड

मिथेन और फिर बाकी गैसें आज

वातावरण में घुल चुकी बड़ी मात्रा में

धरती के ऊपर एक चादर सी तनी है

गर्मी को बाहर जाने से रोक दिया है,

अमेरिका की कन्ट्रीब्यूशन इसमें

सबसे ज्यादा बताई जा रही है आज

भुगतान तीसरी दुनिया से मांगा जा रहा है

यह कहां का कौनसा न्याय है दोस्तो
——————–

0