जन-कविता का सरोकार है कि उसमें श्रमजीवी जनता के ज्वलंत मुद्दे बोलचाल की भाषा (जन भाषा) में ही वर्णित किए जाएं। उसके वातावरण में भी जनजीवन विद्यमान रहता है। और कविता की शैली भी जन-संवाद की ही होती है। वह जनश्रोताओं के लिए ग्राह्य होती है और तत्काल संवाद स्थापित कर लेती है। बहुजन न्यायवादी कवि ओमसिंह अशफ़ाक की यहां प्रस्तुत कविता भी इस तथ्य की पुष्टि करती है कि “नैरेशन की शैली” को भी कविता का आसान, उपयोगी, आकर्षक और संप्रेषणीय माध्यम बनाया जा सकता है बशर्ते कविता का कथ्य सार्थक और जरूरी हो-संपादक ।
खंड दो : उत्तर प्रदेश को रो !
ओमसिंह अशफ़ाक
कविता: उत्तर प्रदेश* को रो !
1
गोरखपुर-बस्ती मंडल में-
भूख ने चाला़ पाड़ दिया !
दो साल भीतर चौबीस को
मौत के घाट उतार दिया !
2
मोहनपुर जिला शाहजहांपुर में
भूख रेशमा के घर बड़गी !
दीवाली की काली रात में-
मौत पति को ले-हड़गी !
3
आठ माह में इक्कीस मौतें-
मोहनपुर बेहाल बण्या !
किसी तरह भी पाट्या कोन्या,
कर्जा जी-का-जाल़ बण्या !
4
सेमर्हना-महाराजगंज में-
सन्तराम एक रहता था !
कुणबे को मेरे भूख डसेगी
भीख मांगता कहता था !
5
छः साल की कन्या खोई !
फिर पत्नी का नंबर आग्या !
सन् दो-हजार-चार के नौवें महीने
काल़ संतराम ने खाग्या !
6
इसी गांव मे लाखन की भी-
मौत भूख से दर्ज़ हुई !
माहमारी की लौड़ रही ना,
भूख बड़ा ही मर्ज हुई ?
7
अन्नपूर्णा अन्तोदय में भी-
भूखे को राशन नहीं मिला !
सन् दो-हजार-पांच का माह दिसम्बर-
तिथि सताइस को भेद खुला !
8
जिला देवरिया के उसरा बाज़ार में,
जब प्रशासन ने छापा मारा !
बाईस ट्रक जब्त किए और
बी.पी.एल. का अनाज़ उतारा !
9
किसको सजा मिलेगी इसमें ?
कौन तरक्की पाएगा !
मरने वाले तो सब मरगे ?
लौट कोई ना आएगा !
10
कुशीनगर में गांव धोघरा-
नाम-नगीना’ एक रहता था !
तीस बरस का पट्ठा था वो-
जाति मुसहर कहता था !
11
चार-दिनों तक फाजिलनगरी में-
भीख मांग दम तोड़ गया !
पत्नी प्रभावती को वो तो
विधवा करके छोड़ गया!
12
था अन्तोदय का कार्डहोल्डर !
ना राशन उसको कभी मिला ?
ना लकड़ी नसीब हुई मौत पे,
किस-किस पै वो करे गिला ?
13
कोटेदार सम्पत गुप्ता ने-
एक दया तो बड़ी करी !
मृत्यु-बाद नगीना की कुछ
राशन घर में लाय धरी !
14
अबकी मिले जो कंवल भारती’
किस्सा यही- सुनाऊंगा !
क्यूं कहते हो दयाहीन ?
इस मुद्दे पे भिड़ जाऊंगा !
15
जीते-जी-राशन नहीं दिया गर,
परलोक का तो इंतजाम किया ?
देखो सम्पत गुप्ता ने भाई !
महान् बड़ा ही काम किया ?
16
जीते-जी तो हिन्दू था वो,
ना मरण बाद अपनाया गया ?
लकड़ी नही मिली तो क्या था,
धरती में दफ़नाया गया?
17
पैंतीस-साला शिवनाथ भी-
दुनियां से मुंह मोड़ गया !
कुशीनगर घुरपट्टी में वो-
विधवा को बिलखती छोड़ गया !
18
बांसगांव की शुभावती ये-
किस्सा स्वयं सुनाती है !
भूख ने पहले हमको तोड़ा
बाद में टी.बी. खाती है!
19
नाम है पूनम ना रात चांदनी,
पंद्रह बरस को वो लड़की थी ।
दलित वर्ग में जन्म लिया था,
घर में पूरी कड़की थी ।
20
मात-पिता हो गये बिदा-
ये पूनम साथ अनाथ हुई ।
ज़िन्दा रहने खातिर कुछ दिन,
चाचा लालमन-साथ हुई ।
कबीरनगर के बरपड़वा में,
सरे आम ये बात हुई ।
21
चाचा तो खुद ही भूखा था,
पर पूनम क़िस्मत वाली थी ।
दोनों वक्त का भोजन देके-
एक साधु ने कुछ दिन पाली थी ।
22
साधु तीर्थ चला गया तो-
पूनम फिर से अनाथ हुई ।
कहें गांव-निवासी मरी भूख से,
प्रधान कहे, क्या बात हुई ?
23
भूख बड़ी या बीमारी-
ये मुद्दा अभी बहस में है ।
अपने-अपने मत के पीछे
सारा ही गांव तैश में है ।
24
इसी बीच यू.पी. के अंदर
सरकार ने जांच कराई है ।
लखीमपुर-खीरी हरदोई सीतापुर,
गौंडा से खबर ये आई है ।
25
नेता-अफसर-ठेकेदार की तिकड़ी,
तीनों का गठजोड़ हुआ !
सारे मिलकर लूटगे राशन
घपला हजार-करोड़ हुआ !
(रचना काल 2006)
————————–
नोट : उपरोक्त कविता में वर्णित* सभी घटनाओं की पुष्टि संदीप पांडेय की जन सुनावाई रपट में हुई है:
1. जिला कुशीनगर के गांव धोगरा निवासी नगीना की मौत 27.10.2004 को हुई बताई गई।
1. कंवल भारती, वरिष्ठ दलित- चिंतक लेखक हैं।
2. जिला कुशीनगर घुरपट्टी के शिवनाथ की मौत 30.01.2025 को हुई थी, जनसुनवाई में ऐसा बताया गया।
