नशा मुक्त हरियाणा

नशा मुक्त हरियाणा

रणबीर सिंह दहिया

नशे की समस्या हरियाणा की प्रगति और विकास पर भी असर डालती है, इसे कमजोर करती है । इसके कारण हरियाणा की उत्पादकता और विकासशील क्षमता पर भी नकारात्मक असर पड़ते हैं । नशे की वजह से हरियाणा में होने वाले अपराध और दुर्घटनाएं भी हरियाणा की उन्नति पर , इसकी अर्थव्यवस्था पर असर डालते हैं।

नशे की लत से उपजी समस्याएं केवल एक पीढ़ी तक सीमित नहीं रहती हैं । आने वाली पीढ़ी पर भी इसका असर पड़ता है। नशे के कारण उपजी शारीरिक विकृतियों और मानसिक समस्याएं आम हैं। नशा करने वाला युवा अपनी लत पूरी करने के लिए गलत काम करने लगता है।

इसके अलावा नशे की तस्करी और वितरण से जुड़े गिरोह समाज में असुरक्षा का माहौल पैदा करते हैं । शराब या दूसरे मादक पदार्थों के नशे में वाहन चलाने से सड़क पर होने वाली दुर्घटनाएं भी बढ़ती हैं। युवा पीढ़ी गलत आदतों को अपने लगी है जिससे हरियाणा के समाज का भविष्य खतरे में दिखाई देने लगा है।

नशा न केवल युवाओं की शिक्षा स्वास्थ्य और कैरियर को बाधित करता है बल्कि उनके सपनों और उनकी सकारात्मक तमाम संभावनाओं को भी काफी प्रभावित करता है।

नशा करने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। तनाव, अकेलापन, असफलता, बेरोजगारी महंगाई, भुखमरी जिनके कारण लोग नशे की ओर खींचते नजर आते हैं। दोस्तों के कहने से भी नशा करने लगते हैं।

हरियाणा को नशा मुक्त बनाना सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बनती है। साथ ही समाज सुधार की संस्थाओं और व्यक्तियों को भी हरियाणा को नशा मुक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने की जरूरत है।

स्कूलों व कालेजों में नशे के दुष्प्रभावों व दुष्परिनामों पर जागरूक करने वाले विशेष कार्यक्रम चलाए जाने चाहियें । युवाओं को यह समझना बहुत आवश्यक है की नशा एक झूठा सहारा है और यह तुम्हारे जीवन को बर्बादी की तरफ ही लेकर जाएगा । जागरूकता अभियान हर एक स्तर पर चलाए जाना बहुत आवश्यक है।

युवाओं को के लिए नशे की चीजें उपलब्ध न हों , इसके लिए सरकार, पुलिस, और प्रशासन को सतर्क रहना बहुत जरूरी है।

माफिया और अवैध नशीले पदार्थों के नेटवर्क को खत्म करना जरूरी है।

  नशे के शिकार लोगों के लिए अधिक पुनर्वास केंद्र खोले जाएं । 

  प्रशिक्षित मनोचिकित्सकों और काउंसलरों की नियुक्ति हो।

   परिवारों को चाहिए कि बच्चों के साथ संवाद बढ़ाएं और उनकी समस्याओं को समझें । 

  बच्चों के लिए सकारात्मक माहौल बनाए रखा जाए ताकि वह किसी भी तनाव या दबाव में ना आयें ।

   नशा करने वालों को दुत्कारने की बजाय उन्हें सुधारने के प्रयास जारी रखे जायें।     

   युवाओं को खेल, संगीत, कला और दूसरी रचनात्मक गतिविधियों की तरफ़ प्रेरित किया जाए।

नशा केवल एक व्यक्ति की को ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश को कमजोर करता है। अगर हरियाणा को ‘हरा भरा हरियाणा जहां दूध दही का खाना’ की तरफ बढ़ता है तो नशे जैसी बुराई को खत्म करना बहुत जरूरी है ।

मगर यह इतना आसान नहीं है । यह तभी संभव है जब बहुत सी संस्थाएं, बहुत से हरियाणा वासी, सब मिलकर बड़े पैमाने पर प्रयास करें । नशा मुक्ति हरियाणा का सपना तभी साकार होगा जब हर एक हरियाणवी न केवल खुद नशे से दूर रहे बल्कि दूसरों को भी इसके दुष्परिणामों से अवगत करवायें ।

युवाओं को नशे से मुक्त करना सिर्फ एक समस्या का समाधान नहीं, बल्कि हरियाणा के विकास के लिए एक अहम कदम है!

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