जेएनयू के वाइस चांसलर पद से शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित को हटाने के वास्ते राष्ट्रपति मुर्मू को लिखा चौथा पत्र

जेएनयू के वाइस चांसलर पद से शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित को हटाने के वास्ते राष्ट्रपति मुर्मू को लिखा चौथा पत्र

  • आरोप- वीसी की बेटी बिना किसी औपचारिक नियुक्ति के शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल

नई दिल्ली । जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (JNUTA) ने बुधवार को यूनिवर्सिटी की विज़िटर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को चौथा पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने वाइस चांसलर शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित को हटाने की मांग की है। एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि वाइस चांसलर ने “सत्ता का घोर दुरुपयोग” किया है और यूनिवर्सिटी के नियमों का लगातार उल्लंघन किया है।

29 अप्रैल के लिखे इस पत्र में, एसोसिएशन ने सितंबर और नवंबर 2025 में भेजे गए अपने पिछले पत्रों का ज़िक्र किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि JNU में हालात और भी ज़्यादा बिगड़ गए हैं।

इस नई अपील का तात्कालिक कारण 327वीं एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में लिया गया एक फ़ैसला है। इस फ़ैसले के तहत, यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों (जिनमें फ़ैकल्टी भी शामिल हैं) के बच्चों के एडमिशन में 5% अतिरिक्त कोटा (supernumerary quota) शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है। JNUTA ने इस कदम का ज़ोरदार विरोध किया है।

उन्होंने इसे प्रतिगामी Regressive बताया है, और कहा कि यह JNU की पुरानी एडमिशन नीति के ख़िलाफ़ है। JNU की एडमिशन नीति का मकसद सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों को एडमिशन का मौका देना रहा है। अपने पत्र में, शिक्षकों के इस संगठन ने तर्क दिया है कि इस तरह का कोटा यूनिवर्सिटी के “डेप्रिवेशन पॉइंट्स सिस्टम” (वंचित वर्ग को मिलने वाले अतिरिक्त अंक) को कमज़ोर करता है। इस सिस्टम के तहत हाशिए पर पड़े तबकों के उम्मीदवारों को, जिनमें महिलाएं और पिछड़े ज़िलों के लोग शामिल हैं, एडमिशन में अतिरिक्त वेटेज दिया जाता रहा है।

पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि यह फ़ैसला बिना किसी ठोस विचार-विमर्श के जल्दबाज़ी में लिया गया। एसोसिएशन का दावा है कि काउंसिल की बैठकें बहुत जल्दबाज़ी में की जाती हैं और उनमें चर्चा के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया जाता। उन्होंने बताया कि शिक्षकों के चुने हुए प्रतिनिधियों ने औपचारिक रूप से इस फ़ैसले पर अपनी असहमति दर्ज कराई है।

एसोसिएशन ने यूनिवर्सिटी में महिलाओं के प्रतिनिधित्व में आई गिरावट की ओर भी ध्यान दिलाया है। 2017-18 में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 51% से ज़्यादा था, जो 2024-25 में घटकर 43.1% रह गया है। एसोसिएशन ने इस गिरावट का संबंध पहले किए गए, कुछ नीतिगत बदलावों से जोड़ा है, जैसे कि Ph.D. एडमिशन में “डेप्रिवेशन पॉइंट्स” को हटा देना भी शामिल है। उन्होंने मांग की है, कि कर्मचारियों के बच्चों के लिए नया कोटा शुरू करने के बजाय, इन पुरानी व्यवस्थाओं को फिर से बहाल किया जाए।

JNUTA ने सवाल उठाया है कि वाइस चांसलर की बेटी कथित तौर पर बिना किसी औपचारिक नियुक्ति के ही स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग की शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल हो रही हैं। एसोसिएशन ने इसे उचित प्रक्रिया (due process) और संस्थागत पारदर्शिता का उल्लंघन बताया है।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय अधिनियम, 1966 के प्रावधानों का हवाला देते हुए, शिक्षक संगठन ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि वे ‘वार्ड कोटा’ संबंधी निर्णय को रद्द करें, और कुलपति के विरुद्ध कार्रवाई शुरू करें। पत्र में उनकी बर्खास्तगी की मांग को दोहराते हुए कहा गया है, कि वर्तमान प्रशासन ने शासन के मानदंडों को कमज़ोर किया है और विश्वविद्यालय की संस्थागत विश्वसनीयता को क्षति पहुंचाई है। पुष्परंजन के फेसबुक वॉल से

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