अमेरिका – इजरायल का ईरान से युद्ध और भारत 

अमेरिका – इजरायल का ईरान से युद्ध और भारत

 

इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में भारत की स्थिति सहज नहीं है। कांग्रेस सहित भारत का समूचा विपक्ष ईरान पर हमले का विरोध कर रहा है। निंदा कर रहा है। सरकार की तरफ से ऐसा कुछ भी नहीं कहा जा रहा है। इसी बीच बुधवार को अमेरिकी नौसेना ने हिंद महासागर में ईरान के युद्धपोत आईआरआईएस डेना को हमला करके डुबो दिया। यह घटना श्रीलंका के पास हुई, लेकिन इस क्षेत्र की निगरानी की जिम्मेदारी भारत की नाैसेना के पास है। श्रीलंका की नाैसेना ईरान के पोत को बचाने और मदद करने के लिए पहुंच जाती है लेकिन भारत की नाैसेना की ओर से कोई हलचल नहीं होती है। ऐसा होने से कई सवाल उठने लगे हैं। भारत की विदेश नीति भी सवालों के घेरे में आ गई है। कई पूर्व सेना के अधिकारियों ने भारत के इस रवैये पर हैरानी जताई है।

दरअसल, ईरान का जहाज भारत के निमंत्रण पर इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026 में हिस्सा लेने के बाद वापस जा रहा था। इनके पास हथियार नहीं था। ईरान का युद्धपोत भारत के साथ मिलन 2026 अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए विशाखापत्तनम आया था, जो भारत की आईओएनएस अध्यक्षता में आयोजित किया गया था।

जाहिर है कि अमेरिका को मालूम था कि ईरान का जहाज भारत के बुलावे पर आया था। वह भारत का मेहमान था इसके बावजूद उसने पर हमला कैसे कर दिया। यदि अमेरिका ने हमला किया तो भारत को इसका विरोध दर्ज कराना चाहिए, लेकिन भारत सरकार इस पर कुछ भी नहीं बोल रही है। इसका दूरगामी असर पड़ने वाला है। जानकार भारत के रवैये से बेहद हैरान हैं। हमले में ईरानी नौसेना के 101 कर्मचारी लापता बताए गए थे। 78 घायल बताए जा रहे हैं। यह संख्या ज्यादा भी हो सकती है।

जिस आयोजन में ईरान का युद्धपोत शामिल होने आया था उसमें ईरान के नौसेना प्रमुख एडमिरल शाहराम ईरानी ने तकनीकी सहयोग और समुद्री कूटनीति पर जोर दिया था। क्या यह सब सुनने के लिए था? इस पर अमल नहीं किया जाना था? यदि अमल नहीं होना था तो आयोजन ही क्यों किया गया था? ईरान यह भी सोच सकता है कि उसे बुलाकर फंसाया गया?

जानकार बता रहे हैं कि इस घटना का भारत पर कई तरह के असर पड़ सकते हैं।

– भारत और ईरान के बीच संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। इसकी वजह तो यही है कि ईरानी युद्धपोत भारत के निमंत्रण पर इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026 में हिस्सा लेने आया था। भारत उसकी रक्षा तो छोड़िए हमले की निंदा भी नहीं कर रहा है।

– मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार पर असर पड़ सकता है। ईरान से तेल का आयात बंद ही है। होर्मुज स्ट्रेट से ईरान ने केवल चीन के जहाज को निकलने देने की बात कही है। जाहिर है कि भारत पर असर पड़ गया है।

– मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

– तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है!

जानकार यह भी सलाह दे रहे हैं कि भारत को अमेरिकी हमले की निंदा करनी चाहिए। ईरान के साथ अपने संबंधों को बनाए रखने के लिए कदम उठाने चाहिए। भारत को चाहिए कि वह इस घटना की जांच करवाए और अमेरिका से जवाब-तलब करे। और इस घटना के बारे में स्पष्टीकरण मांगना चाहिए।सवाल यही है कि क्या भारत सरकार ऐसा कर पाएगी? यही नहीं भारत को ईरान के साथ अपने संबंधों को बनाए रखने के लिए संपर्क में रहना चाहिए।

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