ओमप्रकाश तिवारी की कविता – विकास के नाम पर पेड़ कटवा दो

कविता

विकास के नाम पर पेड़ कटवा दो

ओमप्रकाश तिवारी

 

विकास के नाम पर लाखों पेड़ कटवा दो

जंगल-बाग उजाड़ दो

तालाब पाट दो

आंद्र भूमि खत्म कर दो

फिर कुछ पौधे लगवा दो

जहां से पेड़ काटे गए हों उनसे बहुत दूर

किसी दूसरी जगह

पौधे लगाने के बाद उनकी देखभाल न हो

पौधे सूख जाएँ

फिर पौधे लगाने के क्या फ़ायदा

इसे फिर ढोंग ही कहा जाएगा

एक पेड़ कई साल में तैयार होता है

कई पेड़ एक दिन में काट दिए जाते हैं

कई पौधे एक दिन में लगाए जाते हैं

कई पौधे एक दिन में सूख जाते हैं

ऐसे मौसम बिगड़ेगा ही

गर्मी अधिक और अतिवृष्टि होगी ही

आदमी मरेगा

विकास भी मरेगा

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