विवादों की छाया में शुरू हुआ ‘इंटरनेशनल पोयट्री फेस्टिवल’ 

विवादों की छाया में शुरू हुआ ‘इंटरनेशनल पोयट्री फेस्टिवल’

यूक्रेन और लिथुआनिया की कवयित्रियों ने अपनी सुंदर कविताओं से दिल जीत लिया

अंधेरे में मोमबत्तियों की तरह हैं ये कविगण

अशोक वाजपेयी

नयी दिल्ली। इस बुरे एवम हताशा से भरे समय में रजा फाउंडेशन ने कल विश्व कविता समारोह का आयोजन कर अंधेरे में एक रौशनी फैलाने का काम किया। भले ही यह रोशनी थोड़ी हो टिमटिमाती हो पर उसने जीने की उम्मीद और उल्लास को जगाया दुख और पीड़ा का बयान करते हुए प्रेम की खोज की। आलिंगन और चुम्बन में जीवन के रंग को शब्दों में चित्रित किया युद्ध और विध्वंस के मलबे में फूल खिलाने की कोशिश की।

समारोह में आमंत्रित 13 कवियों में से 5 किन्हीं अपरिहार्य कारणों से नहीं आये पर कल समारोह में जब 8 कवि मंच पर मौजूद थे तो उनमें आधी कवयित्रियाँ ही थीं।

कल की शाम का मुख्य आकर्षण तीन कवयित्रियों की कविताएं थीं। इनमें

लिथुआनिया की कवयित्री इंद्रे वैलेन्टिनैटे (जो कविताएँ लिखने के अलावा एक गायिकाभी हैं,) युवा कवयित्री औसरा काज़िलिउनाइटे भी लिथुआनिया से थीं। तीसरी यूक्रेनी कवयित्री कतेरीना ओलेक्सांद्रिव्ना कलित्को थीं।

तेजी ग्रोवर और पूनम अरोड़ा ने उनकी कविताओं के सुंदर अनुवाद पेश किए तो सुनीत टण्डन ने अंग्रेजी में उनक़ा सुंदर पाठ किया।

जब मंच पर कविता पाठ शुरू हुआ तो इंद्रे ने अपनी प्रेम कविताओं की सेंसुअलिटी से हमें चमत्कृत कर दिया। हिंदी में किसी कवयित्री के पास इतने सुंदर भाव और कल्पनाएं नहीं है ।इन कविताओं में अपनी भावनाओं की ईमानदारी थी जबकि हिंदी में लोग जड़ाऊ कविता अधिक लिखते हैं और वे स्किल से अधिक लिखते हैं।

इंद्रे की कविता में एक खुलापन और निश्छलता थी ।हिंदी की ज्याद तर कवयित्रियाँ बनावटी प्रेम की कविताएं लिखती हैं।

यूक्रेन से आई कवयित्री कतेरीना की रचनाओं में युद्ध की छाया साफ दिखाई देती थी पर उसमें जीवन की पुकार भी थी। निःसहाय जीवन में प्रेम के खिले हुए हरे पत्ते थे।

अशोक वाजपेयी ने कहा कि दुनिया में अच्छी कविता बड़े देशों के कवि नहीं बल्कि इन छोटे छोटे देशों के कवि लिख रहे हैं।

उन्होंने आनंदवर्धन और दांडी को उद्धरित करते हुए कहा कि कवि सर्जक होता है और यह संसार ही एक कविता है। यह शब्दों से उत्पन्न रो शनी है।

उन्होंने दुनिया के शासकों व्यायवसायियों धर्म के ठेकेदारों की आलोचना करते हुए कहा कि कविता प्रतिरोध की आवाज है असहमति का विवेक है जो झूठ न बोलना सिखाती है। जो पवित्र प्रार्थना है शोर में शांति है जो विध्वंस में सृजन की तरह है। उन्होंने यह भी कहा कि मंच पर बैठे ये कविगण मोमबत्तियों की तरह हैं।

सीरिया के अकरम अल्कातरेब सूडान के के.एल तिनै ,मिस्र के यहिहा लबाबीदी स्लोवेहिया की ग्लोरजना वेबर तथा इराक की दुनिया मिखाइल नहीं आ सकी।

पेशे से मेडिकल डॉक्टर समीरा नेग्रौचे, फ्रैंकोफोन अल्जीरियाई कवयित्री हैं।

इटली के आंद्रे नैफिस-साहेली कवि, अनुवादक हैं।

अर्जेंटीना के डैनियल लिपारा कवि, अनुवादक और संपादक हैं.

सिनान अंतून एक इराकी कवि, उपन्यासकार, और अनुवादक हैं।

रज़ा फ़ाउंडेशन के तीन दिवसीय आयोजन में कविताओं से प्रेरित ड्रॉइंग्स की एक चुनिंदा प्रदर्शनी भी लगी थी।इनमें मनु पारेख, गोपी गजवानी, अतुल डोडिया, अमिताव दास, मोना राय, वी. रमेश, अखिलेश, जी.आर. इरन्ना, मिठू सेन, मनीषा गेरा बसवानी, मंजूनाथ कामथ, एस. हर्षवर्धन और मनीष पुष्कले की ड्राइंग्स थीं।

विमल कुमार के फेसबुक वॉल से साभार

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