मंजुल भारद्वाज की कविता- काल देश को पुकार रहा है!

कविता

काल देश को पुकार रहा है!

– मंजुल भारद्वाज

 

काल देश को पुकार रहा है!

आस्था की अंधी गुफ़ा से निकल

विवेक के चैतन्य को आलोकित करो !

काल देश को पुकार रहा है!

झूठ के मायाजाल को तोड़

सत्य की जीत करो !

 

काल देश को पुकार रहा है!

संविधान ने आपको देश का मालिक बनाया है

अब मालिक होने का फ़र्ज़ अदा करो !

काल देश को पुकार रहा है!

बिके हुए,खरीदे हुए,तोड़े हुए, झूठे

राजनेताओं से देश को आज़ाद करो !

काल देश को पुकार रहा है!

 

देश बेचने वालों, देश को धर्मांधता में झोंकने वालों से

देश के लोकतंत्र को मुक्त करो !

काल देश को पुकार रहा है!

इतिहास से सबक लो,लम्हों की खता से

देश को सदियों की तानाशाही से बचा लो !