युद्ध के विरुद्ध जयपाल की दो कविताएं
1.
यूद्ध के बाद
युद्ध के बाद
बच जाएंगे कुछ पिता
कुएं में गिरे पक्षियों की तरह
कुछ माएं
सूखी हुई नदियों की तरह
कुछ बच्चे बचेंगे
टूटे हुए अंडों की तरह
कुछ पड़ोसी
टूटी हुई टहनियों की तरह
शहर
जले हुए पेड़ों की तरह
और गांव
मर गई फसलों की तरह
युद्ध के बाद भी बचा रहेगा युद्ध
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2.
घोषणा
युद्ध की घोषणा होने वाली थी
बच्चे भूल गए थे बाहर जाकर खेलना
समय पर पहुंच जाना स्कूल
मांएं भूल गई थीं बच्चों के लिए खिलौने खरीदना
बच्चों को देना टाफियां और आइसक्रीम
भाई-बहन भूल गए थे आपस में झगड़ना
चीखना-चिल्लाना और फिर मेल-मिलाप
पिता भूल गए थे काम पर जाना
वापसी में लेकर आना कुछ सामान
दादा-दादी भूल गए थे सब किस्से- कहानियां
शहर भूल गया था
अपनी ही सड़कों और चौराहों के नाम
युद्ध से पहले ही गर्क हो चुका था एक शहर
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