हरियाणाः जूझते जुझारू लोग – 127
विक्रम सिंह – कर्मचारी आन्दोलन के जागरूक, समर्पित और भरोसेमंद कार्यकर्ता
सत्यपाल सिवाच
जब भी स्वास्थ्य विभाग के कुछ जागरूक लोगों की चर्चा आती है तो उनमें विक्रम सिंह लैब टेक्नीशियन का नाम अवश्य आ जाता है। यह उनकी पहचान का एक क्षेत्र है। उनकी वास्तविक पहचान इससे कहीं बड़ी है। वे हरियाणा कर्मचारी आन्दोलन के बहुत जागरूक, समर्पित और भरोसेमंद कार्यकर्ताओं में शामिल रहे हैं। आन्दोलन के अलावा व्यक्ति के रूप में बहुत संवेदनशील, मानवीय और सहयोगी स्वभाव के हैं। न्यायप्रियता उनका सहज गुण है। साथ ही वे “यारों के यार” कहावत को चरितार्थ करते हैं। उनके अन्तरंग मित्रों का बड़ा दायरा है।
जीन्द जिले के मांडी कलां गांव में किसान परिवार श्रीमती ओमपति और ईश्वर सिंह के यहाँ 01 जनवरी 1965 को विक्रम सिंह का जन्म हुआ। वे पढ़ाई में होशियार थे। इसलिए दसवीं की मेरिट के आधार उन्हें डिप्लोमा इन मेडिकल टेक्नोलॉजी में प्रवेश मिल गया। उन्होंने ग्रेजुएशन तक शिक्षा प्राप्त की और 23 जनवरी 1987 को स्वास्थ्य विभाग हरियाणा में लैब टेक्नीशियन पद पर नियुक्त हो गए। वे 31 दिसंबर 2022 को चीफ टैक्नीकल ऑफिसर पद से सेवानिवृत्त हुए।
विक्रम सिंह नौकरी में आने के कुछ समय बाद सामूहिक कार्यों के प्रति आकर्षित हुए। विद्यार्थी जीवन से ही वे प्रगतिशील और लोकतांत्रिक मूल्यों को महत्व देते रहे हैं। धीरे-धीरे वे वामपंथी विचारधारा के प्रभाव में आए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन में काम करना शुरू कर दिया। इसके साथ ही विभाग में होने वाले सामूहिक आन्दोलनों में भी सक्रियता से भाग लेने लगे। वे अपनी यूनियन के राज्याध्यक्ष रहे। सर्वकर्मचारी संघ में उन्होंने अलग-अलग पदों का निर्वाह किया। सर्वकर्मचारी संघ में नरवाना खंड प्रधान से उनका सफर शुरू हुआ। सन् 2017 में उनके नेतृत्व में राज्य भर लैब टेक्नीशियनस् ने 100 प्रतिशत हड़ताल की। डराने और दबाने के सभी 600 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया। इस संघर्ष में सर्वकर्मचारी संघ ने पूरा सहयोग किया और अन्ततः 2800 रुपए ग्रेड पे को 4200 रुपए करवाने में सफलता मिली। सेवानिवृत्ति से पहले ही उन्होंने 2020-21 के किसान आन्दोलन के दौरान लंगर चलाने में काफी सहयोग दिया। रिटायरमेंट के बाद वे किसान सभा व रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा में सक्रिय हैं। फिलहाल रिटायर्ड कर्मचारी संघ के जिला प्रधान हैं।
संघर्षों के दौरान वे एक मजबूत, निडर और टिकाऊ व्यक्ति के रूप जाने जाते हैं। वे अनेकों बार पुलिस दमन के खिलाफ डटे रहे हैं। उन्होंने अलग-अलग मौकों पर 40 दिन जेल में बिताए हैं। लैब टैक्निशियन एसोसिएशन के आन्दोलन में उन्हें सस्पेंड किया गया था और सन् 1993 के बड़े संघर्ष उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। आन्दोलन के समझौतों के साथ उत्पीड़न की कार्रवाइयां निरस्त हो गई।
विक्रम सिंह को सर्वकर्मचारी संघ से जुड़ने पर बहुत गर्व है। उनके पिता जी किसान आन्दोलन में तिहाड़ जेल में रहे थे। इसकी छाप विक्रम सिंह पर भी है। वे फूलसिंह श्योकन्द, कामरेड प्रकाश चन्द्र, कामरेड रमेश आदि नेताओं से भी काफी प्रभावित रहे हैं। पूर्व आईएएस अशोक गर्ग उनके स्कूल दौर के सहपाठी एवं मित्र हैं। वे समाज के प्रति समर्पित रहे हैं और अब तक 25 बार रक्तदान कर चुके हैं जिनमें से एक बार आस्ट्रेलिया के मेलबर्न में किया है। उनकी जीवन साथी सुनीता कालीरमण भी स्वास्थ्य विभाग लिपिक एसोसिएशन और सर्वकर्मचारी संघ राज्य नेत्री हैं। उनकी दो संतान हैं। बेटी विवाहित हैं और आस्ट्रेलिया में निजी कंपनी में काम करती हैं। बेटा भी निजी कंपनी में काम करता है। फिलहाल वे जीन्द में रहते हैं।

लेखक – सत्यपाल सिवाच
