विचारों और संघर्षों की जंग आज सबसे ज्यादा जरूरी है

विचारों और संघर्षों की जंग आज सबसे ज्यादा जरूरी है

मुनेश त्यागी

कुछ दिन पहले मैं क्यूबा के भूतपूर्व महान क्रांतिकारी प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और क्यूबा की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव, महान क्रांतिकारी और कमांडर, फिदेल कास्त्रो को पढ रहा था। उनके “विचारों की जंग” लेख को पढकर लगा कि फिदेल के विचारों से अपने सभी दोस्तों, परिचितों और साथियों को भी अवगत कराऊं ताकि भविष्य में ये विचार हम सबके काम आयें। हमारे जनवादी, प्रगतिशील, धर्मनिरपेक्ष और क्रांतिकारी अभियान में हमारी मदद करें। हम गलतियों से बचें और अवश्यकर्णीय को करते रहें और सामाज के वैज्ञानिक समाजवादी क्रांतिकारी परिवर्तन की सबसे ज्यादा जरूरी मुहीम को आगे बढाते रहें और अपनी गलतियों और कमियों से चिपके ही ना रहें, बल्कि समय रहते उन्हें दूर करते रहें और दोस्ताना आलोचना का हमेशा स्वागत करें ताकि हम वर्तमान समय के सबसे जरूरी क्रांतिकारी और वैज्ञानिक समाजवादी अभियान को आगे बढ़ाने के अभियान में सफल हों।

ये वही फिदेल कास्त्रो हैं जिन्होंने क्यूबा में क्रांति के बाद, अपनी पूर्व घोषणा के अनुसार, अपने पिता की 1,15, 600 बीघा जमीन का राष्ट्रीयकरण कर दिया था और उसे किसानों में बांट दिया था। फिदेल कास्त्रो का यह महान क्रांतिकारी कारनामा, दुनिया के किसी भी क्रांतिकारी का अब तक का सबसे बड़ा बलिदान और त्याग है।

ये वही क्रांतिकारी फिदेल कास्त्रो हैं जिन्होंने 1961 में क्रांति के समाजवादी होने की घोषणा की और 2 दिसंबर 1961 को फिदेल कास्त्रो ने सार्वजनिक तौर पर ऐलान किया था कि “मैं सदा मार्क्सवादी लेनिनवादी बना रहूंगा।” अमेरिका की सीआईए, महान क्रांतिकारी फिदेल कास्त्रो से इतनी ज्यादा खौफजदा थी कि उसने 638 बार फिदेल कास्त्रो को जान से मारने की कोशिश की थी, मगर क्यूबा की क्रांतिकारी जनता ने सीआईए के इस क्रांति विरोधी अभियान को सफल नहीं होने दिया और वह लगातार अपने क्रांतिकारी नेता फिदेल कास्त्रो को बचाती रही।

फिदेल कास्त्रो का मानना था कि क्रांति ही नागरिकों को और सारे देशवासियों को वैश्विक नागरिक बना सकती है, उन्हें सच्चा इंसान बना सकती है।उनका कहना और मानना था कि क्रांति में “निरंतरता” बनी रहनी चाहिए, यानी “सतत क्रांति” के बिना क्रांतियां जिंदा नहीं रहतीं। उनका मानना था कि हरेक क्रांतिकारी का कर्तव्य है कि वह सीखने, जानने, पढ़ने, संघर्ष करने और अध्ययन करने को अपना स्थाई नियम बनाए।

फिदेल कास्त्रो पूरी दुनिया के लिए न्याय चाहते थे, समानता चाहते थे, आजादी चाहते थे।उनका मानना था कि मानवता मातृभूमि से भी पहले आती है। हम निष्पक्ष और मानवीय वैश्वीकरण और उदारीकरण चाहते हैं। हम शोषणकारी और प्रभुत्वकारी वैश्वीकरण के पूरे विरोधी हैं। सच में महान क्रांतिकारी फिदेल कास्त्रो की ये मान्यताएं और क्रांतिकारी विचार आज भी कितने सच्चे और जरूरी हैं कि इनको अपनाये बिना, क्रांतिकारी अभियान को आगे नहीं ले जाया जा सकता, सतत क्रांतिकारी नही बने रहा जा सकता और क्रांति के सतत अभियान को पूरा नहीं किया जा सकता।

आइए जानते हैं महान क्रांतिकारी फिदेल कास्त्रो के विचारों के बारे में,,,,,,,

…हम सब मिलजुलकर एक बेहतर दुनिया के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।

…क्रांतिकारी साहित्य और विचार एवं क्रांतिकारी कानून ही समाजवादी चेतना विकसित करते हैं।

…कोई भी क्रांति केवल संस्कृति और विचारों से ही हो सकती है।

…कोई भी आदमी जबरन क्रांतिकारी नही बन सकता।

…जो विचार बोते हैं, उन्हें जनता को कुचलना नही पडता।

…जाग्रित और सचेतन जनता ही जनविरोधी साम्राज्यों को भी मात दे सकती है।

…विचारवान और एकजुट जनता को परास्त नही किया जा सकता है।

…हमें अपने दुश्मनों से निरंतर, लगातार और सतत वैचारिक जंग लडनी होगी।

…हमें दुनिया के शोषित, शासित, उत्पीडित और अन्यायग्रस्त गरीब लोगों के लिए खून पसीना बहाना होगा।

,,,आज सारी दुनिया को और सारी मानवता को बचाने की जरूरत है।

,,,हमने क्रांति की कोशिश की, क्रांति की, और इसे बचाया है।

,,,पूंजीवादी वैश्विक साम्राज्य के वैश्विक हमलों को समाजवादी वैश्विक संघर्षों से ही परास्त किया जा सकता है, हराया जा सकता है।

,,,नवउदारवादी वैश्विकरण सारी दुनिया को अपनी प्राइवेट सम्पत्ति बनाने पर आमादा है, वह इसे अपनी निजी सम्पत्ति बनाना चाहता है।

,,,नवउदारवादी वैश्विकरण सारी दुनिया को लूट खसोट रहा है।

,,,वह सारी दुनिया को अपने विशाल और अनियंत्रित मुक्त व्यापार में तबदील करना चाहता है।

,,,मार्क्स ऐंगेल्स आज तक के सबसे बड़े आर्थिक और राजनैतिक चिंतक हैं।

,,,नवउदारवादी क्या चाहते हैं,,,,, टैक्स नही, कोई नियंत्रण नही, टैक्स छूट, पूंजी और माल की मुफ्त आवाजाही, बंटी हुई दुनिया, सस्ते मजदूर, गुलाम मजदूर, अंधे, गूंगे, बहरे, बंटे हुए मजदूर।

,,,अमेरिका पूरी दुनिया को बौना बनाये रखना चाहता है।

,,वह देशों और महाद्वीपों को, लोगों को विभाजित करना और विभाजित किये रखना चाहता है।

,,,मैं एक न्यायपूर्ण दुनिया को देखना चाहता हूँ,,,,, फिदेल कास्त्रो,

,,,हम सारी दुनिया के लोगों,,, काले, गोरे, भारतीयों, चीनियों, रूसियों, अमेरिकियों, यूरोपियनों, अफ्रीकियों,,,,, को एकजुट, जाग्रित, भाईचारापूर्ण, और आजाद, व समान देखना चाहते हैं।

,,,क्यूबा हमें दुनिया के सबसे शक्तिशाली पडोसी से लडना और जीतना सिखाता है।

,,,जो लेनिन और समाजवादियों की पुस्तकें और साहित्य नही पढते, वे अग्यानी हैं,,,,,,,,,,,फिदेल कास्त्रो,

,,,हमने असम्भव को किया है और असम्भव को प्राप्त किया है।

,,,हमने एक झटके में नस्ली भेदभाव को खत्म कर दिया था।

,,,हमने अपने उत्तरी दुश्मन के,, हमलों, हस्तक्षेप, धमकियों, युध्द, सबोटेज यानी तोड़ फोड़ का मुकाबला किया है और समाजवादी चेतना का निर्माण किया है।

,,अंतर्राष्ट्रीयतावाद ने हमारी मदद की और हमने भी अपना अंतर्राष्ट्रीयतावादी फर्ज र्निभाया है।

,,,विचार अमर हैं, उन्हें कोई नही मार सकता।

,,किसी को भी, अपनी इमदाद करने वालों की मदद करनी चाहिए।

,,हमें अपने मददगार का, मददगार होना चाहिए।

,,हम जाग्रित जनता के समर्थन से ही दुश्मनों का मुकाबला कर पाये।

,,,हमारा मुख्य काम है कि हम अपने विचार प्रकाशित और प्रचारित करें।

,,,अपने विचारों को थोपो मत, जनता को अपनी परिस्थितियों के हिसाब से निर्णय लेने दो, हम उनके फैसले का समर्थन करेंगे।

,,,विश्व नागरिक होने के नाते, हमें अपने विचार प्रकट करने चाहिएं।

,,,मानवता हमारी मातृभूमि है।

,,,हमने संसाधनों में जो कटौतियां कीं, वे मजदूरों, किसानों, नौजवानों, छात्रों, महिलाओं, पुरूषों की सहमति से की थीं।

,,,क्या क्यूबा की क्रांति ताकत के बल पर जिंदा है?

,,,नही, नही। यह जनता की भागेदारी, समर्थन, विशाल सहयोग, और संघर्ष से हासिल की गयी है।

,,,हमने इसे बनाया है, बचाया है, इसकी हिफाजत की है।

,,एकजुट जनता जो लडने और जीतने को तैयार हो, वह सर्वशक्तिमान और शक्तिशाली और अजेय होती है।

,,,मानवीय चेतना को बनाने, बचाने में सामाजिक पर्यावरण और सामाजिक परिस्थितियों की मुख्य भूमिका होती है।

,,अगर मैं उच्च वर्ग में पढा पला होता तो मैं यूटोपियाई ही होता, मार्क्सवादी या कम्युनिस्ट विचारों का न होता।

,,,कोई भी जन्मजात क्रांतिकारी, कवि, लेखक, या योध्दा नही होता, परिस्थितियां ही उसका निर्माण करती हैं और वे ही उसे अच्छा या बुरा आदमी बनाती हैं।

,,,सबसे मुख्य बात है कि आप, प्रतिबध्द, अनुशासित, वफादार और सबसे ऊपर ईमानदार बने रहिये।

महान क्रांतिकारी और दुनिया के सबसे बड़े क्रांतिकारी, महान बलिदानी और त्यागी फिदेल कास्त्रो के ये तमाम विचार आज भी दुनिया के तमाम वामपंथियों और क्रांतिकारियों के लिए बेहद जरूरी हैं। इनका अध्ययन, मनन, कार्यान्वयन और स्मरण आज भी सबसे ज्यादा जरूरी है। फिदेल कास्त्रो के ये सच्चे और असाधारण विचार, देश और दुनिया में क्रांतिकारी आंदोलन को और तेज दिशा प्रदान करेंगे।

          इंकलाब जिंदाबाद,

       जनता की एकता जिंदाबाद,

     जनता का भाईचारा जिंदाबाद,

    वैज्ञानिक समाजवाद जिंदाबाद,

लुटेरा पूंजीवाद साम्राज्यवाद मुर्दाबाद।

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