जसवीर त्यागी की कविताएं

जसवीर त्यागी की कविताएं

यूँ ही

उसने फोन किया
व्यस्तता के कारण
मैं बात न कर सका

मैंने फोन करने का संदर्भ पूछा
वह बोली-
कोई ख़ास काम नहीं था
बस!यूँ ही किया

मैं देर तक
ध्यान की धूप में खड़ा
उसकी स्मृति की सरिता में नहाता रहा

कभी-कभी
कितना अच्छा लगता है
जब कोई कहता है-
बस!यूँ ही फोन किया।

सुरक्षित चोर

चोरियाँ होती रहती थीं निरंतर
लोग सोते रहते थे
रोते और परेशान होते रहते थे

एक दिन कॉलोनी वासियों की
आपात बैठक बुलाई गयी

सभी ने चिंता जताते हुए
चोरियाँ रोकने पर किया चिंतन
और सर्वसम्मती से तय किये गये
चोरों को पकड़ने के उपाय

गली-मोहल्ले के द्वार
लोहे के मजबूत
किवाड़ों से किये गए सुरक्षित
ताक़तवर द्वारपाल तैनात किए गए
मुख्य-मुख्य रास्तों पर

कुछ दिन सब सोये चैन की नींद
लेकिन!नींद की उम्र लम्बी न थी
चोरी फिर भी हो गई

कॉलोनी वासियों का अटूट विश्वास था
बाहर के बेघर,बेसहारा
भूखे गरीब ही करते हैं चोरियाँ

कोई मानता न था
भूखा-गरीब होना
चोर होने का कोई मापदंड नहीं

यह भी तो हो सकता है
चोर बाहर नहीं
कॉलोनी के भीतर ही हो

द्वारपालों से घिरा
लोहे के मजबूत दरवाजों में सुरक्षित।

वजूद

एक फटा लिफाफा
सड़क पर पड़ा था

तेज़ गति से आते-जाते
वाहनों की रफ़्तार की हवा से
उड़ा-उड़ा फिरता लिफाफा

वाहनों के दूर जाते ही
हवा फिर उसे
सड़क पर छोड़ देती

लिफाफे की उड़ान
हवाओं के हाथों में थी

ख़ुद में तो उसका वजूद
एक फटे लिफाफे का था।

 

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