रणबीर सिंह दहिया की रागनी- खूनी कीड़े नई सदी के

रणबीर सिंह दहिया की रागनी- खूनी कीड़े नई सदी के

 

1***

खूनी कीड़े नई सदी के

 

नई सदी के ये खूनी कीड़े फेर गुलाम बनाया चाहवैं।

संकट फैला के चारों कान्हीं म्हारी मोर नचाया चाहवैं।।

1.

पानी खाद बिजली पै सब्सिडी खत्म हुई सारी क्यों

धरती लाल स्याही मैं चढ़ी दरवाजे खड़ी बीमारी क्यों

ब्याह शादी मुश्किल होगे बढ़ी ईब बेराजगारी क्यों

पेट्रोल डीजल महंगे करे ना ढंग की मोटर लारी क्यों

बढ़ा कै बेरोजगारी नै ये ध्याड़ी घटाया चाहवैं।।

2.

गिहूं अर चावल देश मैं ये चिड़िया घर मैं टोहे पावैंगे

दूध शीत बिना ये बालक म्हारे भैंसा कान्ही लखावैंगे

फसल के मालिक बिदेशी होज्यां दूर बैठकै हुकम चलावैंगे

हम के बोवां अर के खावां देशी बदेशी साहूकार बतावैंगे

दारू सुलफा स्मैक पिलाकै हमनै कूण मैं लाया चाहवैं।।

 

3.

दारू बुरी बीमारी जगत के मां जानै दुनिया सारी भाई

फेर क्यों या काढ़ी जावै सै नुकसान करती भारी भाई

माफिया पाल ये दारू के करैं फेर फरमान जारी भाई

म्हारे बालक फंसावैं जाल मैं म्हारी अकल मारी भाई

लाशां के उपर दारू बेचैं अपणा मुनाफा बढ़ाया चाहवैं।।

 

4. अमरीका जापान मैं सब्सिडी हम देते सभी किसानां नै

इम्पोर्ट ड्यूटी भारया उनकी पिटवाते म्हारे धानां नै

उड़े कुत्ते बिल्ली मौज करैं मुश्किल आड़ै इन्सानां नै

कमेरे जमा चूस कै बगाये देशी बिदेशी धनवानां नै

कहै रणबीर सिंह मुनाफा खोर ये लगाम लगाया चाहवैं।।

 

2****

मतना खेलो तम म्हारी गेल्याँ खेल यो म्हंगा पड़ज्यागा।।

म्हारे नौजवान साथ आगे उस दिन नक्शा झड़ज्यागा।।

1

म्हारी तबाही लिखी जिनमैं सब नीति इसी बना राखी

उप्पर तैं कड़ थेपड़ो म्हारी जड़ मैं सुई चुभा राखी

किसान इब समझै सारी कसूती ढाल यो भीड़ज्यागा ।।

म्हारे नौजवान साथ आगे उस दिन नक्शा झड़ज्यागा।।

2

इतने तैँ काम ना चल्या न्यारी न्यारी जातां मैं बाँट दिए

किसानां की कड़ तोड़ दी पर कसूते ढालाँ काट दिए

हूंकार भर किसान यो राज कै साहमी अड़ज्यागा।।

म्हारे नौजवान साथ आगे उस दिन नक्शा झड़ज्यागा।।

3

बांटल्यो जात धर्म उप्पर घने दिनां ना पार पड़ैगी

किसान समझै धीरे धीरे हट हट कै मार पड़ैगी

अपणे बचा मैं सोचैगा यो धुर की लड़ाई लड़ज्यागा।।

म्हारे नौजवान साथ आगे उस दिन नक्शा झड़ज्यागा।।

4

अडाणी और अम्बानी सुणो सुणो बदेशी कम्पनी आल्यो

किसान लावा बण फूटैगा बच सकै ज्यान तो बचाल्यो

रणबीर ले ल्यो रै सम्भाला ना हाल जमा बिगड़ज्यागा।।

म्हारे नौजवान साथ आगे उस दिन नक्शा झड़ज्यागा।।

3****

आज मरण तै बचना सै तो नया रास्ता बनावां रै

फांसी खाना ठीक नहीं कुछ सही कर दिखावाँ रै

कोए धर्म नहीं कहता चोर बाजारी करनी चाहिए

कोए धर्म नहीं कहता या मारा मारी करनी चाहिए

कोए धर्म नहीं कहता किसे नै जारी करनी चाहिए

कोए धर्म नहीं कहता दुष्टता भारी करनी चाहिए

क्यों हैवानियत छागी मिलकै सवाल उठावां रै ।।

 

द्रोपदी चीर हरण ऊपर सब क्यों चुप्पी साध गए

बड़े सूरमा और चिंतक कायरता दिखा बाध गए

जख्मों पै नामक गेर दिया कर पैदा घणी राध गए

हिम्माती हुए बुराई के फैला चौगरर्दें सड़ांध गए

चीर हरण क्यों हुया उड़े सारे बूझना चाहवां रै ।।

 

वो के धर्म जो इंसान नै जात पात के ऊपर लड़ावै

बड्डा मंदिर बनाने खातर वो छोटा मंदिर तोड़ बगावै

वो के धर्म जो हम नै ना मानवता का पाठ पढ़ावै

क्रोध लोभ मोह त्याग का जो ना रास्ता सही दिखावै

इसे धर्म नै के चाटैंगे मिल कै नई लहर चलावां रै ।।

 

इंसानियत बचै बचै मानवता कुछ करना होगा

सच्चाई कहने को अपना कदम आगे धरना होगा

ज्यान की बाजी लाणी हो कुर्बानी तै ना डरना होगा

आज नहीं संभले तो खामियाजा घणा भरना होगा

कहै रणबीर सिंह मानवता का गीत गूंजावां रै ।।

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