Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

राजकुमार कुम्भज की कविता- कहलाती है माँ

कविता कहलाती है माँ राजकुमार कुम्भज   हथेलियों में नरम धूप और पलकों पर सपनों की राख लिए क़दम-क़दम नापती…

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मंजुल भारद्वाज की कविता – माँ का सृजन सौन्दर्य

कविता माँ का सृजन सौन्दर्य  मंजुल भारद्वाज   एक माँ की सुंदरता सिर्फ़ उसका सृजन होता है स्त्री की सुंदरता…

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अनुपम शर्मा की कविता- हैप्पी मदर्स डे

  कविता हैप्पी मदर्स डे अनुपम शर्मा   मेरी बेटी ने मदर्स डे पर एक रील भेजीं— कि “अगले जन्म…

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मुनेश त्यागी की कविता – जुल्मों से लड़ता हुआ हर इंसान मुझे अच्छा लगता है

कविता जुल्मों से लड़ता हुआ हर इंसान मुझे अच्छा लगता है मुनेश त्यागी   गुलामी की बेड़ियां तोड़ता, अपने हकों…

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राजकुमार कुम्भज की तीन कविताएँ

राजकुमार कुम्भज की तीन कविताएँ 1. ये धिक्कार बने औज़ार ऊॅंचाइयों पर खड़ा एक आदमी नीचे ज़मीन पर देखता है…

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मंजुल भारद्वाज की कविता – विद्रोह ही कला है!

कविता विद्रोह ही कला है! – मंजुल भारद्वाज   आपके इर्द गिर्द एक जाल है जन्म का भाषा का राष्ट्र…

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राजकुमार कुम्भज की तीन कविताऍं

राजकुमार कुम्भज की तीन कविताऍं   1 ये धिक्कार बने औज़ार   ऊॅंचाइयों पर खड़ा एक आदमी नीचे ज़मीन पर…

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मंजुल भारद्वाज की कविता – मैं शून्य में ताकता रहता हूँ !

कविता मैं शून्य में ताकता रहता हूँ ! -मंजुल भारद्वाज   मैं शून्य में ताकता रहता हूँ शून्य बड़ा हो…

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अनुपम शर्मा की कविता – स्त्री मन

कविता स्त्री मन अनुपम शर्मा   स्त्री, क़िताब की तरह होती है, जिसे देखते हैं सब,अपनी-अपनी ज़रुरतों के हिसाब से।…