कविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

राजकुमार कुम्भज की कविता – जाग रहे हैं जॅंगल में फूल

 कविता जाग रहे हैं जॅंगल में फूल राजकुमार कुम्भज   प्रदर्शनकारी हैं,पुलिस है,चारों ओर पुलिसकर्मी फेंक रहे हैं पत्थर प्रदर्शनकारियों…

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मंजुल भारद्वाज की कविता – पता नहीं?

कविता पता नहीं? – मंजुल भारद्वाज   खरपतवार सा खप जा घास सा सब जगह पसर जा जानवर चर जायेंगे…

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अनुपम शर्मा की कविता – जंगल अभी जिंदा है

कविता जंगल अभी जिंदा है अनुपम शर्मा   जंगल अभी जिंदा है अक्सर कहा जाता है कि समाज सभ्य हो…