हरियाणा लोक सेवा आयोग की चयन प्रक्रिया पर उठते सवाल

हरियाणा लोक सेवा आयोग की चयन प्रक्रिया पर उठते सवाल

पारदर्शिता, यूजीसी नियम, खाली पद व आरक्षण का संकट

डॉ. रामजीलाल

भारतीय लोक सेवा आयोग की भांति हरियाणा लोक सेवा आयोग भी एक संवैधानिक निकाय है,जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 315के तहत संचालित होता है. इस का दायित्व हरियाणा राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के लिए ग्रुप ए और ग्रुप बी अधिकारियों ,सहायक प्रोफेसरों,पीजीटी शिक्षकों और सिविल सेवा अधिकारियों का चयन करना है. पिछले एक वर्ष में आयोग द्वारा भर्तियां गंभीर विवादों में घिर गई हैं .शैक्षणिक योग्यता रखने वाले सैकड़ों अभ्यर्थी पंचकूला स्थित एचपीएससी कार्यालय के बाहर अनिश्चित कालीन धरने पर बैठे हैं .

1 चयन प्रक्रिया 35 % क्वालीफाइंग अंक का विवाद:

हरियाणा पब्लिक सर्विस कमिशन की मुख्य लिखित विषय ज्ञान परीक्षा में 35% न्यूनतम अंक की शर्त सर्वाधिक विवादित है. अभ्यर्थियों का आरोप है कि प्रमाण पत्र इस तरह बनाया जाता है कि 90% से अधिक योग्य अभ्यर्थी पास नहीं हो पाते .नतीजा यह है कि विज्ञप्ति पदों हिस्सा खाली रह जाता है. हरियाणा सरकार के सरकारी कॉलेजों में लगभग 40% पद आज भी खाली हैं. हरियाणा के विपक्षी दलों के नेताओं का आरोप है कि हरियाणा पब्लिक सर्विस कमिशन की यह नीति हरियाणा के युवाओं के सरकारी सेवाओं के प्रवेश में बहुत बड़ी बाधा है.

एक पीड़ित अभ्यर्थी का बयान :

“मैंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पीएचडी की है, नेट-जेआरएफ क्वालीफाई किया है और 12 शोध पत्र प्रकाशित हैं. फिर भी हरियाणा पब्लिक सर्विस कमिशन की परीक्षा में मुझे सिर्फ 28 अंक मिले”.-डॉ प्रियंका ,अंग्रेजी अभ्यर्थी, कुरुक्षेत्र.

2.यूजीसी नियमों का उल्लंघन और न्यायपालिका हस्तक्षेप:

हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन के वर्तमान पैटर्न में मैट्रिक से पीएचडी तक कोई वेटेज नहीं दिया जाता .यह यूजीसी रेगुलेशन 2018 का उल्लंघन है .12 मई 2026 को पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय ने अंग्रेजी विषय के 613 सहायक प्रोफेसर पदों की भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया, जिसमें केवल 51 अभ्यर्थी ही पास हो पाए थे.

3 एससी आरक्षण आंकड़ों में भारी विसंगति:

हरियाणा पब्लिक सर्विस कमिशन की भर्ती में अनुसूचित जाति गंभीर सवाल उठे हुए हैं. हरियाणा में एससी आरक्षण 20% निश्चित है .सहायक प्रोफेसर भर्ती के वास्तविक आंकड़े गंभीर विसंगति दिखाते हैं.

अपेक्षित बनाम वास्तविक आवंटन:

सांख्यिकीय विश्लेषण :कुल 1819 पदों में एससी वर्ग के लिए20%के हिसाब से 363 0.8 पद आरक्षित होने चाहिए थे. लेकिन वास्तविक आवंटन केवल 307 पदों का हुआ. अन्य शब्दों में 56.8 पदों का अंतर विद्यमान है .कुल मिलाकर एससी आरक्षण 20% से घटकर सिर्फ 16. 24% रह गया और लगभग 67 पद एससी वर्ग के उम्मीदवारों छीन लिए गए. कामर्स में सबसे ज्यादा 89% और अंग्रेजी में सबसे कम 0. 42% का अंतर है

आर्थिक स्थिति ,प्रमाण पत्र और बाहरी उम्मीदवारों का विवाद

ओबीसी (OBC )व ईडब्ल्यूएस (EWS) के उम्मीदवारों की ज्ञापन की तारीख से अंतिम तिथि तक की अवधि तक का प्रमाण पत्र देना होता है ,जो व्यावहारिक नहीं है .विवाहित महिला अभ्यर्थियों को ससुराल की आय का प्रमाण पत्र देने में दिक्कत आती है.
यह एक बड़ी विचित्र विडंबना है कि हरियाणा सरकार को हरियाणा में कोई ऐसा विद्वान नहीं मिला जिसको हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन का चेयरमैन बनाया जाए. जब चेयरमैन बाहरी होगा तो कमीशन को बाहरी अभ्यर्थी ही योग्य नजर आएंगे. यही कारण है कमीशन विवादों के घेरे में है. हरियाणा के विपक्षी दलों के नेताओं का आरोप है कि हरियाणा के बाहर के कमजोर एकेडमिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवारों के चयन की तहरीर दी जा रही है .

आंदोलन और प्रशासन की प्रतिक्रिया

ओबीसी ब्रिगेड, राजनीतिक दलों और छात्र संगठन ने पंचकूला में एचपीएससी (HPSC)कार्यालय के सामने बड़ा प्रदर्शन किया .तेरह सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल जिसमें राजेंद्र तंवर , जसविंदर सिंह, इंद्रजीत सिंह, डॉ. श्री कृष्णा बागोरिया सहित चार महिला अभ्यर्थी भी थी, मुख्यमंत्री के ओएसडी से मिला. ओएसडी ने एचपीएससी के अध्यक्ष से जल्द बैठक करने का आश्वासन दिया है ताकि समस्या समाधान किया जा सके.

निष्कर्ष और सुझाव –

एचपीएससी की वर्तमान चयन प्रणाली चार स्तरों पर विवादों के घेरे में है. प्रथम,यूजीसी के नियमों की अवहेलना .द्वितीय ,अव्यावहारिक क्वालीफाइंग मानदंडों से पदों का खाली रहना .तृतीय, एससी आरक्षण का सही क्रियात्मक न होना. चतुर्थ ,प्रमाणपत्रों की शर्तों में पारदर्शिता की कमी होना .

तत्काल सुझाव : तत्काल सुधार हेतु अधोलिखित सुझाव हैं.

प्रथम,यूजीसी रेगूलेशन 2018 के अनुसार एकेडमिक रिकॉर्ड नेट- एचडी और शोध को विशेष अधिमान दिया जाए. द्वितीय 35 % क्वालीफाइंग अंक शर्त को हटाया जाए या तर्कसंगत बनाया जाए. तृतीय,एससी वर्ग सहित सभी आरक्षित वर्गों का आरक्षित कोटा सुनिश्चित किया जाए ,और चतुर्थ, बैकलॉग भरने को प्राथमिकता दी जाए . इन सुझावों के क्रियान्वयन के द्वारा हरियाणा लोकसेवा की साख में वृद्धि होगी और ओबीसी व अन्य आरक्षित वर्गों को न्याय मिलेगा.

(नोट -यह लेख सार्वजनिक दस्तावेजों, न्यायालय के आदेशों,आरटीआई डेटा और अभ्यर्थियों के बयानों पर आधारित है तथा इसके प्रकाशन में चार्ट और टेबल दोनों के द्वारा प्रकाशित आंकड़ों का प्रयोग किया गया है. परंतु इसमें हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन का आधिकारिक बयान नहीं है.)

डॉ. रामजीलाल, समाज वैज्ञानिक, पूर्व प्राचार्य, दयाल सिंह कॉलेज, करनाल (हरियाणा-भारत)

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