साथी राजरानी की शहादत…

यह रागनी डॉ रणबीर सिंह दहिया ने लिखी है। जिस समय यह रागनी लिखी गई उस समय वे पीजीआई रोहतक में प्रोफेसर थे। वह लिखते हैं- गेस्ट टीचर्स के संघर्ष को देखकर एक बात याद आ गयी । शीला बाई पास पर प्रदर्शन पर गोलियां चली । वहां राजरानी भी गोली का शिकार हुई। जीप ड्राइवर राजरानी को लेकर आया और मैं भी इमरजेंसी में पहुंचा। वहां क्या हुआ इस बारे उन्हीं दिनों एक रागनी लिखी थी पेश है :—

रागनी

साथी राजरानी की शहादत…

रणबीर सिंह दहिया

बिन आयी मौत साहमी तड़फै सड़क पै पड़ी हुई।
पड़ी जांघ मैं खाकै गोली फेर एक बर खड़ी हुई ।।
1
धड़ाम दे पडी सड़क पै खून फव्वारा ना काबू आरया
साथी तो ठावैं पुलिस रोकै मन होग्या उसका खारया
धक्का स्टार्ट जीप मेरी उन सबनै फेर धक्का मारया
घाल जीप मैं चाल पड़े चेहरां पीला पड़ता जारया
पीली पड़गी राजरानी कितै कितै सांस अड़ी हुई ।।
पड़ी जांघ मैं खाकै गोली फेर एक बर खड़ी हुई ।।
2
ड्रिप लायी ईसीजी मशीन वा सीधी लाइन दिखावै
कई डॉक्टर कट्ठे होगे एक छाती बार बार दबावै
खत्म होली राजरानी कहता डॉक्टर भी घबरावै
चारों कान्ही हाहाकार मच्या गैल भीड़ चढ़ती आवै
देखैं पड़ी खून मैं लतपथ साथिन उड़ै खड़ी हुई ।।
पड़ी जांघ मैं खाकै गोली फेर एक बर खड़ी हुई ।।
3
पड़ी राजरानी बिस्तर पै जनों मेरी तरफ लखावै
इसा दिखाई देवै जनों यो हमनै सन्देश देना चाहवै
आत्म सम्मान बचाल्यो रलकै आज हकूमत दबावै
संघर्ष का रास्ता लेल्यो यो मंजिल तक पहोंचावै
मुठ्ठी भींचगी राजरानी की थी जाड़ी भी कड़ी हुई।।
पड़ी जांघ मैं खाकै गोली फेर एक बर खड़ी हुई ।।
4
गोली मारी सांथल के म्हां करया जुल्मी काम सुणो
राजरानी गेस्ट टीचर नै यो दिया आखरी पैगाम सुणो
नेता अफसर पुलिस की कसनी होगी लगाम सुणो
आख़री सांस मैं उसनै लिया साथिन का नाम सुणो
रणबीर रोवै उड़ै खड़या साच्ची बात ना घड़ी हुई ।।
पड़ी जांघ मैं खाकै गोली फेर एक बर खड़ी हुई ।।

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