Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

जयपाल की कविता–पाखण्डी

कविता पाखण्डी जयपाल   वे आर्थिक सुधार करेंगे मरने को मजबूर कर देंगे रोजगार की बात करेंगे रोटी छीन लेंगे…

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रणबीर सिंह दहिया की रागनी- गलत विज्ञान

रणबीर सिंह दहिया की रागनी- गलत विज्ञान गलत विज्ञान मानवता का विनाश करै जो इसा शैतान चाहिये ना। संसार नै…

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जसवीर त्यागी की तीन कविताएं

जसवीर त्यागी की तीन कविताएं मोची ठसाठस भरी बसें चमचमाती कारें और चीखते-चिल्लाते स्कूटर रोज निकलते हैं उसकी आँखों के…

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जयपाल की कविता – कब तय करेंगे

कविता कब तय करेंगे जयपाल   जहां गोदाम खा रहे हों अनाज पेट खा रहे हों आम की गुठलियां जहां…

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राजकुमार कुम्भज की कविता – जाग रहे हैं जॅंगल में फूल

 कविता जाग रहे हैं जॅंगल में फूल राजकुमार कुम्भज   प्रदर्शनकारी हैं,पुलिस है,चारों ओर पुलिसकर्मी फेंक रहे हैं पत्थर प्रदर्शनकारियों…

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रणबीर सिंह दहिया की रागनी- एक फौजी की घरवाली की दास्तां

रागनी एक फौजी की घरवाली की दास्तां तर्ज -कसमें वायदे प्यार वफा- रणबीर सिंह दहिया   सोसाटी आला बाबू जी…

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मंजुल भारद्वाज की कविता- कैसी घिनौनी जनता हो तुम

कविता कैसी घिनौनी जनता हो तुम  मंजुल भारद्वाज आज तुमने युवाओं बच्चों के सपने छीन लिए उनके भविष्य को बर्बाद…

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रणबीर सिंह दहिया की रागनी – विवेक

रणबीर सिंह दहिया की रागनी – विवेक विवेक सूरज साहमी कोहरा टिकै ना अज्ञान विवेकमयी वाणी कै। अज्ञानता छिन्न-भिन्न होण…