Blogसमय/समाजसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

उद्योगपति और व्यापारी हिंदी साहित्य से क्यों विमुख हो गए?

उद्योगपति और व्यापारी हिंदी साहित्य से क्यों विमुख हो गए? शंभुनाथ आधुनिक युग के आरंभ में, 19वीं सदी में ही…

Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांतसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

राजकुमार कुम्भज की कविता – जी रामजी

कविता जी रामजी राजकुमार कुम्भज की   वंदे मातरम् वंदे माताराम वंदे भ्राताराम वंदे तोताराम वंदे छोटाराम वंदे मोटाराम भारतमाता…

Blogमनोरंजन/सिनेमा

सतलुज’ ने मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया

‘सतलुज’ ने मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया चंडीगढ़। दिलजीत…

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ओमसिंह अशफ़ाक की दो कविताएं

ओमसिंह अशफ़ाक की दो कविताएं   कर्ज़े नीच्चै सांस फूलगी !   म्हारी कर्ज़े नीच्चै सांस फूलगी, तू करता फिरै…