जसवीर त्यागी की बेटी केंद्रित कुछ और कविताएं

जसवीर त्यागी की बेटी केंद्रित कुछ और कविताएं

रस

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जब कुछ पढ़ रहा होता हूँ
बिटिया आकर पूछती है-

कुछ लेकर आऊँ?
चाय-पानी
या कुछ अन्य

मैं कहता हूँ-
अभी तो कुछ नहीं चाहिए

कुछ घण्टों बाद
वह फिर अपने पुराने सवाल को
इतनी संजीदगी और आत्मीयता से रखती है
कि मैं मना नहीं कर पाता

बिटिया बहुत प्यार से
मनचाहा प्रस्तुत करती है

मैं जो पढ़ रहा होता हूँ
उसमें पहले से ज्यादा रस आने लगता है।

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बसे स्वादिष्ट भोजन

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दूसरी क्लास में
पढ़ने वाली मेरी बिटिया

हर रोज
स्कूल के टिफिन में
छोड़ देती है थोड़ा-सा भोजन

मैं बचा हुआ भोजन
बड़े चाव से खाता हूँ

दुनिया का
सबसे स्वादिष्ट भोजन है
बिटिया के टिफिन का
बचा हुआ अन्न।

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बिटिया की पसंद

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बिटिया ने मेरे लिए
एक शर्ट पसंद की

पत्नी ने कहा-
अगर पापा को पसंद नहीं आयी तो

सुनकर बिटिया बोली-
मुझे अच्छी तरह पता है
अपने पापा की पसंद

बिटिया की पसंद की शर्ट पहनकर
मैं जल भरे बादल-सा
बरसना चाहता हूँ
अपनों के आत्मीयता के आँगन में।

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पापा-बेटी

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बाज़ार जाने को तैयार पापा को
पाँच साल की बिटिया ने कहा-
मेरे लिए चिप्स मत लाना पापा

घर-वापसी पर
घरेलू सामान के साथ
चिप्स का पैकेट भी निकला

माँ ने पिता से पूछा-
जब बेटी ने चिप्स को मना किया था
तो फिर क्यों लाये आप?

बिटिया ने अपनी बाहें
पापा के गले में डालकर कहा-

मैंने पापा को चिप्स के लिए
मना किया था
ताकि उन्हें लाना याद रहे।

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बेटियाँ

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बेटियाँ
मिश्री की डली हैं

हमारी फीकी जिंदगी को
मिठास से भरती हैं।

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बेटी की विदाई

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वह बेटी की विदाई का
एक लोक गीत था

जिसकी भाषा
हमारी भाषा से भिन्न थी

गीत के बोल
हमारी पकड़ से परे थे

फिर भी
सुनने वालों की आँखें नम थीं
भाषा चाहे कोई हो

बेटी की विदाई पर
वह भी
विदा होती हुई लगती है।

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बेटियाँ जब विदा होती हैं

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बेटियाँ जब विदा होती हैं
सूनेपन की बारिश में
भीग जाता है समूचा घर-आँगन

घर के हर कोने में छिपा
बेटियों की अनुपस्थिति का अहसास
दूर से ही चमकता है

ज्यों रेगिस्तान में चमकती है
दूर-दूर तक सिर्फ़ रेत ही रेत।

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बाल-डॉक्टर

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बदलती ऋतु के बीच
एक दिन बिन बताये ही आ धमका बुखार

अब आ गया
तो एकदम से जाने को कैसे कहूँ?
न चाहते हुए भी
कुछ आवभगत तो करनी ही थी

मुझे उदास देख
मेरी पाँच साल की बच्ची
ले आयी अपनी टॉयज मेडिकल किट

और पहनकर कोट
बन गयी नन्हीं डॉक्टर
पेंसिल से पर्ची पर
अपनी डॉक्टरी की भाषा में कुछ दवाई लिखीं

दिये कई निर्देश
कड़ाई से पालन करने का दिया आदेश
मोबाइल को किया सख्त मना

अपनी टॉफियां और नमकीन की पुड़िया बना
सुबह-शाम पानी से लेने को कहा

कुछ देर मेरी ओर निहारकर बोली-
आपको इंजेक्शन भी लगेगा
याद रहे इंजेक्शन लेते समय शोर नहीं करना

बिटिया बाल-डॉक्टर ने
नयी चिकित्सा प्रेम-पद्धति का परिचय दिया
गले में मेरे अपनी बाहें डालकर
गालों पर प्यार किया

इस तरह बिटिया ने
पापा का उपचार किया।

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हर लड़की राजकुमारी होती है

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टी.वी.पर महाभारत सीरियल में
द्रौपदी स्वयंवर को देखते हुए
बिटिया ने जिज्ञासा भाव से पूछा-

इतने पहले उस समय
क्या लड़कियों को अपनी इच्छा से
विवाह करने का अधिकार था ?

बिटिया के बालों में
तेल लगाती हुई माँ बोली –
यह राजाओं की बेटियों के लिए था
हर किसी के लिए नहीं

उत्तर सुनकर
बेटी पलभर रही मौन
फिर शब्दों के तीरों से
निशाना साधते हुए बोली-

हर लड़की अपने आप में राजकुमारी होती है
पिता अगर राजा नहीं है
तो लड़की का क्या दोष ?

माँ ने देखा
यह बोलते हुए
बेटी का आत्मविश्वास
किसी राजकुमारी से कतई कम न था।

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2 thoughts on “जसवीर त्यागी की बेटी केंद्रित कुछ और कविताएं”

  1. आपकी लेखनी में भावों की गहराई और शब्दों का अद्भुत संतुलन है।

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