सलिल चौधरी और दो बीघा जमीन के निर्माण की कहानी

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सलिल चौधरी और दो बीघा जमीन के निर्माण की कहानी

सलिल चौधरी उन दिनों बंगाली फिल्मों में संगीत दे रहे थे। चूंकि उन्होंने बंगाल अकाल की विभीषिका को बहुत करीब से देखा था, तो उन्होंने एक किसान की कहानी पर एक फ़िल्म स्क्रिप्ट लिखना शुरू किया। सलिल दा का विचार था कि अपनी कहानी पर वो बंगाली भाषा में ही फ़िल्म बनाएंगे। कहानी कुछ यूं थी कि एक किसान से उसकी ज़मीन एक ज़मींदार द्वारा ज़बरदस्ती छीन ली जाती है। जिसके बाद वो पैसा कमाने कलकत्ता आता है और रिक्शा चलाने लगता है।

सलिल दा ने अपनी कहानी का ज़िक्र ऋषि दा, ऋषिकेश मुखर्जी से किया। ऋषि दा ने सलिल दा को बताया कि बिमल दा, बिमल रॉय बॉम्बे से कलकत्ता आ रहे हैं। आप बिमल दा को ये कहानी सुनाइए। ऋषि दा की सलाह पर सलिल दा ने बिमल दा से मिलने का अपॉइन्टमेन्ट लिया। फिर तय वक्त पर सलिल चौधरी बिमल रॉय से मिले। बिमल दा को उन्होंने अपनी कहानी सुनाई। लेकिन पूरी कहानी सुनने के बाद बिमल दा ने कोई रिएक्शन नहीं दिया। उन्होंने सलिल दा से अगले दिन आने को कहा।

सलिल दा अगले दिन बिमल दा से मिलने पहुंचे। मगर उन्हें पता चला कि बिमल दा को तो अर्जेंटली बॉम्बे जाना पड़ गया। वो सुबह की फ्लाइट लेकर बॉम्बे पहुंच चुके हैं। सलिल चौधरी को ये बात अच्छी नहीं लगी। उन्हें बहुत फ्रस्ट्रेशन हुई। और गुस्सा भी आया। उन्हें लगा कि बिमल दा को उनकी कहानी पसंद नहीं आयी है। मगर एक सप्ताह बाद ही उन्हें बिमल दा की तरफ़ से एक टेलीग्राम मिला। बिमल दा ने उसमें लिखा था कि वो सलिल चौधरी की उस कहानी को हिंदी में बनाना चाहते हैं। कोई दिक्कत ना हो तो सलिल चौधरी बॉम्बे आ जाएं।

बिमल दा के बुलावे पर अपनी कहानी लेकर सलिल चौधरी पर साल 1953 में पहली बार सलिल चौधरी बॉम्बे पहुंचे। और बिमल दा ने उनकी उस कहानी पर हिंदी में एक फिल्म बनाई। वो फिल्म आज भी हिंदी सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में शुमार की जाती है। नाम आप भी जानते हैं उस फ़िल्म का। दो बीघा ज़मीन। सलिल दा से ही बिमल दा ने इस फ़िल्म का संगीत भी कम्पोज़ कराया था। स्टोरी का क्रेडिट भी सलिल दा को ही दिया गया।
आज महान संगीतकार सलिल चौधरी की पुण्यतिथि है। साल 1995 में 5 सितंबर को सलिल चौधरी का देहांत हुआ था। सलिल दा को सादर श्रद्धांजलि। ये सभी बातें सलिल दा ने एक बहुत पुराने रेडियो इंटरव्यू में बताई थी।

किस्सा टीवी फेसबुक वॉल से साभार

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