किशोरों पर सोशल मीडिया के प्रभाव
गुरमीत अंबाला
एक खबर के अनुसार ऑस्ट्रेलिया देश ने 13 अगस्त 2026 तक साढ़े सात लाख किशोरों के अकाउंट सोशल मिडिया से हटाने के निर्देश दिए हैं।
मेटा ने कहा है कि उसने 16 साल से कम उम्र के ऑस्ट्रेलियाई किशोरों के 7,56,000 अकाउंट को हटा दिया है।जिसमें इंस्टाग्राम,फेसबुक शामिल हैं। इसके साथ ही आस्ट्रेलिया विश्व का पहला ऐसा देश बन गया है जहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इंस्टाग्राम,टिकटॉक,फेसबुक,स्नैपचैट,यू ट्यूब,एक्स हेंडल पर एकाउंट नहीं खोले जाने का नियम बनाया है।

आस्ट्रेलिया सरकार लंबे समय से सोशल मीडिया के बच्चों/किशोरों पर पड़ते दुष्प्रभाव को लेकर गंभीर से विचार कर रही थी, इसके तहत 21 नवंबर 2024 को Social Media Minimum Age Bill संसद में पारित किया।दिसंबर 2024 में इसे Royal Assent मिला और यह कानून बन गया। इसका आधिकारिक नाम Online Safety Amendment (Social Media Minimum Age) Act 2024 है।
सोशल मीडिया के अच्छे प्रभावों को स्वीकार करते हुए यह माना गया कि किशोरों पर इसके दुष्प्रभाव ज्यादा पड़ते हैं। इससे किशोरों में मानसिक तनाव और चिंता, नींद में कमी ,एकाग्रता में कमी , आंखों की रोशनी अन्य दुष्प्रभाव,दूसरों से लगातार तुलना करने से हीन भावना बनना, नशे की लत की तरह लग जाना , हिंसक/ग्राफिक सामग्री, यौन सामग्री, अस्वस्थ भोजन खाने की तत्परता,ऑनलाइन उत्पीड़न (bullying, sexual exploitation) सामाजिक अलगाव ( बहुत अधिक ऑनलाइन समय परिवार और वास्तविक जीवन के दोस्तों से जुड़ाव कम कर सकता है।),जीवन से असंतुष्ट, मानसिक/शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव की आशंका भी सरकारी दस्तावेजों में दर्ज की गई है।
इसी लिए लंबी चर्चा के बाद उक्त निर्णय लिए गए हैं और सबसे बड़ी बात यह जिम्मेदारी सोशल मिडिया प्लेटफार्म पर डाली गई है कि वो किशोरों के एकाउंट चिन्हित कर उन्हें हटाए।जिसमें चेहरे,आवाज ,व्यवहार विश्लेषण,भाषा शैली आदि गतिविधियों के पैटर्न को ए. आई.से परख कर कदम उठाए गए हैं।
मेटा ने कहा है कि उसने दिसंबर में ऑस्ट्रेलिया में किशोरों के इंटरनेट मीडिया उपयोग पर बैन लागू होने से ठीक पहले से लेकर जून तक 4,62,000 इंस्टाग्राम अकाउंट और 2,94,000 फेसबुक अकाउंट को डीएक्टिवेट किया। जनवरी तक हटाए गए अकाउंट की संख्या 3,31,000 इंस्टाग्राम अकाउंट और 1,73,000 फेसबुक अकाउंट थीं।
कंपनी ने कहा कि वह कानून का पालन करना चाहती है। यह बात ऐसे समय कही गई है, जब ऑस्ट्रेलिया का इंटरनेट रेगुलेटर उन प्लेटफॉर्म के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है, जिनके बारे में यह बात सामने आ रही है कि वे जरूरी कदम उठाने में नाकाम रहे हैं।
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असल मेंआस्ट्रेलिया देश बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर बेहद गम्भीर है।आस्ट्रेलिया बच्चों/ किशोरों को केवल फोन से दूर करना भर नहीं चाहता है, वह पहले से ही उन्हें रचनात्मक कार्यों और सामाजिक जीवन की ओर प्रेरित करता रहा है जिसमें सर्वप्रथम किशोरों को खेलों की तरफ प्रेरित करना पहले से शामिल है बहुत कम आबादी वाला देश होने के बावजूद भी खेलों को लेकर बहुत आगे है पेरिस ओलम्पिक 2024 में आस्ट्रेलिया पद तालिका में चौथे स्थान पर रहा है।खेलों को लेकर इतना गंभीर है कि लगभग सभी खेलों के उन्नत स्टेडियम उन्होंने बना रखे हैं। तीन साल के बच्चे को ही वहां के ज्यादातर अभिभावक खेलों के लिए को प्रेरित करने लगते हैं और फिर उन्नत खेल व्यवस्था उनके लिए आगे के मार्ग आसान बना देती है।
सर्दी,गर्मी,बरसात सभी मौसम में वहां बच्चे/किशोर खेलते नजर आते हैं,स्कूलों में बेहतरीन कोच की व्यवस्था रहती है । कुछ कुछ अंतराल के बाद विभिन्न खेलो के मुकाबले वहां आम देखे जा सकते हैं,जिसमें स्कूलों के बच्चे बढ़ चढ़ कर भाग लेते हैं।
इसके अतिरिक्त साइकिल चलाना, पैदल चलना, पार्क में खेलना, स्केटबोर्डिंग, समुद्र तट की गतिविधियाँ और प्रकृति भ्रमण की तरफ भी किशोरों को प्रेरित किया जाता है। किशोर अक्सर साइक्लिंग करते नजर आते है जिसके लिए घरों के आगे पैदल चलने और साइक्लिंग के लिए सुंदर पथ बने हुए हैं।
ऐसे कैफे या स्थान है जहां बच्चे/किशोर पेंटिंग करते दिखते हैं ।
पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए यहां सख्त कानून है किशोर भूमि संरक्षण और सामाजिक कार्यों में भी काम करते देखे जा सकते हैं।
भारत अगर किशोरों के सोशल मिडिया के सख्त कानून बनाता है,जो समय की आवश्यकता है तो देखना होगा कि कहीं बच्चों/किशोरों को रचनात्मक कार्यों की बजाए धार्मिक कर्मकाण्डों में उलझा कर कहीं और बर्बाद न कर दे।
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