जयपाल की कविता – क्रान्ति की जरूरत 

 कविता

क्रान्ति की जरूरत

जयपाल

 

क्रांति की ज़रूरत है खेतों के लिए

ताकि फसलों का स्वाद किसान भी जान सके

क्रांति की ज़रूरत है मजदूरों के लिए

ताकि श्रम की कीमत पता चले

क्रांति की ज़रूरत है बुद्धिजीवियों के लिए

ताकि बुद्धि और श्रम का मेल संभव हो

क्रांति की ज़रूरत है परिवार के लिए

ताकि परिवार के अर्थ का विस्तार संभव हो

क्रांति की ज़रूरत है हर घर के लिए

ताकि सारी दुनियां सबका घर बन सके

क्रांति की ज़रूरत है बच्चों के लिए

ताकि बचपन को लौटाया जा सके

क्रांति की ज़रूरत है युवकों के लिए

ताकि एक नए समाज की रचना संभव हो

क्रांति की ज़रूरत है बूढ़े-बुज़ुर्गों के लिए

ताकि बुढ़ापे को उपहास से बचाया जा सके

क्रांति की ज़रूरत है हर इंसान के लिए

ताकि समाज में इंसानियत जिंदा रहे

क्रांति की ज़रूरत है कविता के लिए

ताकि कविता किताबों से बाहर आ सके

क्रांति की जरूरत है कहानी के लिए

ताकि एक नई कहानी लिखी जा सके

क्रांति की ज़रूरत है इतिहास के लिए

ताकि एक नया इतिहास लिखा जा सके

क्रांति की ज़रूरत है सारी दुनिया के लिए

ताकि सबकी मुक्ति का रास्ता तलाशा जा सके

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