दो समकालीन ईरानी कविताएँ
1
रोमांचक सुबह
मोहम्मद बरज़ेगर
दुनिया के पैर दुख-दर्द से भारी हैं
निराशाओं का दर्द
जो दीमक की तरह जंगल को खा जाता है
कोई आज़ादी को ढूँढते हुए
मौत के दस्तों के बीच चहलकदमी करता है
कोई खुशी को खोजता हुआ, रास्ते के दुख के बारे में पूछताछ करता है
कोई इस खून से लथपथ रास्ते से लौटना चाहता है
लेकिन तुम , औ फरवरदीन1
की सुबह की हवा!
त्योहार की हवा!
कह दो कि यहीं है
बता दो कि काले घने बादलों के बीच से भी
उम्मीद की चोटी की शान
दिखाई पड़ रही है
जो सभी थके हुए मुसाफ़िरों को अपने पास बुला रही है
सबसे कह दो … उठो!
उस अमर निवास तक
भले ही रास्ता अंधेरा प्रतीत हो रहा हो
लेकिन वह रोमांचक सुबह
पास है…
—————–
2
इंसान और जानवर
मोहम्मद काज़िम काज़िमी
बारिश से बादल आ जाएं तो आसमान बरसने लगे
शायद तब यह गले पड़ी हुई गांठ… खुल पाए
तुम तो गई थी बाबा की पानी, रोटी और बाबा का पाठ पढ़ने2
तुमने सोचा भी न होगा कि यह पाठ तुमसे तुम्हारी जान ले लेगा
तुमने खुद से कहा कि माँ तीर्थ के रास्ते में हो
और पिता जी रोटी खरीदने गए हों
और वो एक दुकान से सस्ते फल लेने
और दूसरी दुकान से ईरान का झंडा खरीदने गए हों
सड़क के ठंडे शरीर पर, और हाथ में ईरान का झंडा
यहां आसमान में बादल छा जाने चाहिए
यहां बारिश होनी चाहिए
किसी ने उनके जाने वाले रास्ते पर भी पानी नहीं छिड़का
कोई आईना और कुरान लेकर भी खड़ा नहीं हुआ3
सोचो, इस प्यासे मैदान में पानी पिलाने वाला
और अपने साथ लाई हुई पानी की मश़्क को
अपने दांतों से पकड़ने के लिए मजबूर हो4
सोचो! एक तरफ कलेजे को जलाने वाली भाले की क्रूर नोक,5
और दूसरी तरफ़ कलेजा खाने वाला हल्दी-मेहंदी का जश्न मनाए
क्या तुमने सोचा भी था कि जंगल के इस कानून में
यह भी देखना पड़े कि
एक जानवर का बम आकर
सैकड़ों इंसानों की जान ले ले?
हम देखेंगे से साभार
मोहम्मद बरज़ेगर तेहरान, ईरान में रहते हैं।
मोहम्मद काज़िम काज़िमी मशहद, ईरान से हैं।
अनुवाद – डॉ अज़ीज़ महदी
————
1. ईरान के कैलेंडर का पहला महीना जो बहार के मौसम के आरंभ का प्रतीक है।
2. ईरान के बच्चों को सिखाए जाने वाले तीन शब्द, जो लिखाई और वाक्य निर्माण की नज़र से काफी कार्यक्षम हैं।
3. ईरानी लोक विश्वास के अंतर्गत मुसाफ़िरों के जाने के बाद उस रास्ते पर पानी डालने से वह लोटकर जरूर आते हैं।आईना और कुरान भी इसी विश्वाास के अंतर्गत लाया जाता है।
4. इस्लामी इतिहास में कर्बला के इतिहास की ओर इशारा।
5. कर्बला की ओर इशारा।
